दवा क्षेत्र में विदेशी निवेश का विरोध धनबाद. दवा क्षेत्र में विदेशी पूंजी के बढ़ते निवेश के विरोध में शहर के विक्रय प्रतिनिधियों ने गुरुवार को बिहार-झारखंड सेल्स रिप्रेंजेंटेटिव यूनियन के बैनर तले जुलूस निकाला. जुलूस शहरों का भ्रमण करते हुए रणधीर वर्मा चौक पर सभा में तब्दील हो गया. मौके पर वक्ताओं ने कहा कि हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स 1954, आइडीपीएल 1961 अन्य कानूनों के कारण देश में दवा की कीमत दूसरे देशों की तुलना में कम थी. भारत में दवा कंपनियों का उदय हुआ, लेकिन आज स्थिति बदल रही है. दवा की कीमतों में भारी वृद्धि हो रही है. बहुराष्ट्रीय कंपनियों को दवा के क्षेत्र में सौ प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी पूंजी निवेश के कारण ऐसा हो रहा है. दवा मूल्य नियंत्रण की समाप्ति, वैक्सीन निर्माण करने वाली इकाइयों का बंद किया जाना एवं सार्वजनिक क्षेत्रों की दवा कंपनियों को उपेक्षित कर बंद करने की नीति ने भारतीय दवा बाजार में प्रत्यक्ष विदेशी पूंजी निवेश को 2014 में दोगुणा कर 126 बिलियन अमेरिकी डॉलर कर दिया है. इस निवेश के कारण भारतीय दवा कंपनियों का स्वामित्व अब बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हाथों में चला गया है. मौके पर संयुक्त सचिव असीम हलधर, संदीप आइच, प्रभात सिंह, अरिंदम विश्वास, सुनील शुक्ला आदि काफी संख्या में प्रतिनिधि मौजूद थे.
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विक्रय प्रतिनिधियों ने निकाला जुलूस
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Prabhat Khabar Digital Desk
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