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सिविल सर्विस की तैयारी न कर पढ़ाने की राह चुनी

बदलते युवा-पांच धनबाद : हमारे यहां पढ़ने वाले बच्चे मेरे लिए परिवार की तरह हैं. सच कहूं तो सभी छात्र-छात्रएं मुङो अपने बच्चों की तरह लगते हैं. जब वे अच्छा रिजल्ट करते हैं तो बहुत खुशी होती है. मैं बहुत गरीबी से यहां तक पहुंचा हूं. अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेज से पढ़ाई के बाद भी नौकरी […]

बदलते युवा-पांच
धनबाद : हमारे यहां पढ़ने वाले बच्चे मेरे लिए परिवार की तरह हैं. सच कहूं तो सभी छात्र-छात्रएं मुङो अपने बच्चों की तरह लगते हैं. जब वे अच्छा रिजल्ट करते हैं तो बहुत खुशी होती है. मैं बहुत गरीबी से यहां तक पहुंचा हूं. अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेज से पढ़ाई के बाद भी नौकरी के तरफ रुझान नहीं रहा. मैं पहले भी शिक्षक था, आगे भी शिक्षा बांटूंगा. गरीब छात्रों पर पूरा ध्यान रहता है. जब वह छात्र अच्छा रिजल्ट करते हैं तो मुझसे ज्यादा खुश कोई नहीं हो सकता है.
गरीबी देखी, पर नहीं हुआ निराश
इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट चला रहे अजय ने बताया कि वह बहुत गरीब परिवार में पले बढ़े. गरीबी को नजदीक से देखा. राजस्थान कोटा के रेजोनेंस में पढ़ाई की. यहां 100 प्रतिशत स्कॉलरशिप मिली. आर्थिक तंगी के कारण वहां आश्रम में रहता था. खाना का भी कहीं से इंतजाम हो जाता था. दिन भर पढ़ाई करता था और रात को किसी छोटे-मोटे स्थान पर नौकरी करता था.
ऐसा वर्ष 2004 से लेकर 2006 तक चला. इस दौरान आइआइटी का एग्जाम निकाल लिया. मुङो एडमिशन लेने की जानकारी तक नहीं थी. वहां के शिक्षक मुङो बहुत चाहते थे. अपना पैसा देकर पर मुङो काउंसिलिंग के लिए मुंबई भेजा, जहां मुङो आइएसएम में इंटिग्रेटेड अप्लाइड फिजिक्स में दाखिला मिला. यहां भी स्कालरशिप मिली. वर्ष 2011 में आइएसएम से पास आउट हुआ.
प्रतिभा हो तो गरीबी बाधा नहीं
अजय ने बताया कि वह गरीब परिवार से है. पढ़ाई के दौरान गरीबी हावी थी. किसी तरह आइएसएम में प्रथम वर्ष की पढ़ाई की. जैसे ही सेकेंड इयर में गये ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया. आज उनके इंस्टीट्यूट में सैकड़ों बच्चे पढ़ रहे हैं. कई गरीब छात्रों को मुफ्त में शिक्षा देते हैं. जरूरत पड़ी तो एडमिशन तक की राशि दे देते हैं. पिछले कुछ सालों से कई बच्चों को अपने घर में रख कर पढ़ाते हैं. कहते हैं कि ये सभी मेरे छोटे भाई हैं. जहां भी जायेंगे अच्छा करेंगे. पढ़ने लायक बच्चों को गरीबी नहीं देखने देता हूं, मुङो पता है कि गरीबी क्या होती है. मैं आइएसएम में पढ़ते हुए घर का पूरा खर्च उठाता था. अपने छोटे भाई को अच्छी शिक्षा दिलायी. वह एमबीए कर अच्छी नौकरी में है. बहन की शादी अच्छे घर में की है. वह भी खुश है.
सिविल सर्विस की तैयारी कराना चाहते थे माता-पिता
मां-पिता दोनों मेरे इंस्टीट्यूट खोलने पर कभी राजी नहीं हुए. खास कर मां मुङो पढ़ाई के बाद सिविल सर्विस की तैयारी के लिए कह रही थी, लेकिन मुङो नौकरी नहीं पसंद थी. आज मैं कई लोगों व छात्रों की मदद कर रहा हूं, नौकरी में होता तो शायद नहीं कर पाता. आज मैं अपनी मर्जी का मालिक हूं. जिसे चाहता हूं, मदद करता हूं. उतना कमा लेता हूं कि पूरे परिवार की देखभाल हो सके और दूसरों की मदद कर पाऊं. मेरी दिली इच्छा है कि कोटा रिजोनेंस में शिक्षक बन बच्चों को पढ़ाऊं.
Prabhat Khabar Digital Desk
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