धनबाद : ऊर्जा विभाग के जीएम एससी मिश्र ने बताया कि 10 अगस्त तक ऊर्जा विभाग ऑन लाइन हो जायेगा. तब लोग ऑन लाइन बिल जमा कर सकेंगे.
तार आया, अब तेल भी आयेगा : ट्रांसफॉर्मर रिपेयरिंग के लिए टीआरडब्ल्यू में तार आ गया है. अगले एक-दो दिनों में तेल भी आ जायेगा. उसके बाद कोई दिक्कत नहीं होगी. निर्बाध बिजली के लिए 33 एवं 11 हजार वोल्ट के तार के नीचे के पेड़ों की छंटाई करने को कहा गया है.
गोधर से जुड़ेगी मनइटांड़ की लाइन : मनइटांड़ क्षेत्र में बिजली की समस्या दूर करने के लिए वहां की लाइन को पुटकी के अलावा गोधर से भी जोड़ने का काम शुरू हो रहा है . 10 पोल लगाने पर ही दूसरे क्षेत्र से भी मनइटांड़ को लाइन मिलने लगेगी.
डीवीसी में खराबी के कारण बिजली संकट
दो दिनों तक रहे बिजली संकट पर जीएम ने कहा कि डीवीसी की पुटकी और पाथरडीह दोनों लाइन में आयी खराबी के कारण ही बिजली संकट रहा. उन्होंने कहा कि बरसात के बावजूद उनके कर्मचारी-पदाधिकारी मुस्तैद रहे.
मनोहर कुमार
धनबाद : रेट टेल के अलावा अब बीएसएनएल भी बीसीसीएल में वाइफाइ व नेटवर्किग का कार्य करेगा. इस पर अंतिम निर्णय गुरुवार को बीसीसीएल के सीएमडी डॉ टीके लाहिड़ी व बीएसएनएल के सीजीएम (झारखंड सर्किल) केके ठाकुर के बीच वार्ता के बाद ले ली गयी.
आधिकारिक सूत्रों की माने तो पांच वर्षो तक नेटवर्किग कार्य बीएसएनएल को दिया गया है. मालूम हो कि वर्तमान में बीसीसीएल में नेटवर्किग का कार्य रेट टेल नामक कंपनी कर रही है. लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था के लिए बीएसएनएल से करार किया गया है, ताकि रेट टेल की सेवा बाधित होने पर बीएसएनएल की सेवा ली जा सके. यह करार लगभग पांच करोड़ का बताया जाता है.
क्या होगा बीएसएनएल का काम
पांच साल तक बीएसएनएल को बीसीसीएल मुख्यालय से लेकर एरिया, एरिया से लेकर कोलियरी स्तर पर नेटवर्किग कार्य करना है. कंपनी के सभी वे ब्रिज, स्टोर व कार्यालय को नेट व वाइफाइ की व्यवस्था उपलब्ध करानी है.
रेट को लेकर चल रही थी जिच
आधिकारिक सूत्रों की मानें तो बीसीसीएल ने एक वर्ष पूर्व नेटवर्किग कार्य के लिए निविदा निकाली थी, जिसमें एल वन रेट टेल कंपनी हुई थी. जिसके बाद रेट टेल को नेटवर्किग का कार्य दिया गया था.
लेकिन कंपनी को वैकल्पिक व्यवस्था के लिए एक ओर कंपनी के साथ करार करना था, लेकिन बीएसएनएल का रेट काफी अधिक था और बीसीसीएल प्रबंधन रेल टेल के रेट पर ही काम करना चाह रहा था. कई दौर में दोनों कंपनियों के अधिकारियों में वार्ता हुई, पर रेट को लेकर सहमति नहीं बन पा रही थी. बाद में बीएसएनएल ने रेट कम करने के लिए दिल्ली से अनुमति मांगी. अनुमति के बाद ही कंपनी ने रेट टेल के रेट पर ही काम करने की सहमति दी.
