धनबाद : सरकारी पैसे के गबन मामले में बुधवार को आउटसोर्स एजेंसी राष्ट्रीय सिक्युरिटी प्रा डिडक्टर पर बैंक मोड़ थाना में प्राथमिकी दर्ज की गयी. नगर आयुक्त विनोद शंकर सिंह ने एजेंसी के संचालक बबलू झा को नामजद किया है.
एजेंसी पर निगम से 380 रुपया प्रति ड्राइवर की दर से रकम लेकर मात्र 171 रुपया भुगतान करने का आरोप है. बैंक मोड़ पुलिस संचालक की गिरफ्तारी के लिए जगह-जगह छापामारी कर रही है.
क्या है मामला : निगम ने नवंबर 2014 में 55 ट्रैक्टर की खरीद की. आउटसोर्स कर मजदूर व ड्राइवर रखे गये. फ्रंट लाइन को मजदूर व राष्ट्रीय सिक्युरिटी प्रा डिडक्टर को ड्राइवर देने का टेंडर मिला.
ड्राइवर के लिए 380 रुपया प्रतिदिन की हाजिरी तय की गयी. एग्रीमेंट के अनुसार एजेंसी को को इएसआइ व इपीएफ भी मजदूरों को देना था. लेकिन एजेंसी ने न तो न्यूनतम मजदूरी दी और ना ही इएसआइ व इपीएफ ही दिया. नवंबर 2014 से जून 2015 तक राष्ट्रीय सिक्युरिटी प्रा डिडक्टर ने निगम से 32 लाख रुपया उठा लिया. ड्राइवरों को लगभग 16 लाख पेमेंट किया गया. लगभग 20 लाख का गबन कर लिया गया.
कैसे खुली पोल : वेतन की मांग को लेकर बुधवार को ट्रैक्टर ड्राइवरों ने काम ठप कर दिया. मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल पहुंचे और काम बंद करने का कारण पूछा. ड्राइवरों ने कहा कि पिछले चार माह से वेतन नहीं मिल रहा है. माह में साढ़े चार हजार मिलता है, लेकिन नियमित नहीं मिलता. मेयर ने कहा कि 380 रुपये प्रति दिन की हाजिरी है फिर इतना कम वेतन क्यों मिलता है.
इस पर ड्राइवरों ने कहा कि हमलोगों को 171 रुपया हाजिरी मिलती है. न तो इएसआइ और न पीएफ दिया जाता है. मेयर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एग्रीमेंट की कॉपी की जांच की. जांच में लाखों रुपये का गबन का मामला सामने आया. मेयर ने नगर आयुक्त को प्राथमिकी का आदेश दिया. मेयर के आदेश पर नगर आयुक्त ने थाना में गबन और धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज करायी.
ऑडिट ने भी किया था ऑब्जेक्शन
महालेखाकार की ऑडिट टीम ने भी इएसआइ व इपीएफ मामले पर ऑब्जेक्शन किया था. नगर आयुक्त से पूछा था कि जब एजेंसी इएसआइ व इपीएफ का कागजात नहीं दे रही है फिर क्यों भुगतान किया जा रहा है. ऑडिट ऑब्जेक्शन के बाद भी संबंधित एजेंसी को लगातार बिल पास किया जाता रहा.
फ्रंट लाइन ने उठा लिये डेढ़ करोड़
सफाई मजदूर देने वाली आउटसोर्स कंपनी फ्रंट लाइन पर भी ऑडिट ने ऑब्जेक्शन किया है. ऑडिट टीम ने कहा है कि फ्रंट लाइन ने मजदूरों का न तो इएसआइ दिया और न इपीएफ. फिर किस आधार पर लगातार एजेंसी को पेमेंट किया जा रहा है. फ्रंट लाइन ने नवंबर से जून तक डेढ़ करोड़ रुपया लिया है.
