देश के टॉप 100 बी-स्कूल में आइएसएम

धनबाद: सामान्यत: भू- विज्ञान व खनन (अर्थ साइंस एंड माइनिंग) के लिए देश-दुनिया में ख्याति प्राप्त आइएसएम अब देश के टॉप 100 बी(बिजनेस) स्कूल में शामिल हो गया है. जानी मानी पत्रिका इंडिया टुडे के ताजा सर्वे में आइएसएम के डीएमएस( डिपार्टमेंट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज) को 52 वीं रैकिंग मिली है. झारखंड के एक्सएलआरआइ(जेवियर लेबर […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | November 3, 2013 10:44 AM

धनबाद: सामान्यत: भू- विज्ञान व खनन (अर्थ साइंस एंड माइनिंग) के लिए देश-दुनिया में ख्याति प्राप्त आइएसएम अब देश के टॉप 100 बी(बिजनेस) स्कूल में शामिल हो गया है. जानी मानी पत्रिका इंडिया टुडे के ताजा सर्वे में आइएसएम के डीएमएस( डिपार्टमेंट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज) को 52 वीं रैकिंग मिली है. झारखंड के एक्सएलआरआइ(जेवियर लेबर रिलेशन इंस्टीट्यूट) जमशेदपुर ने तीसरी रैंकिग हासिल की है. सेकेंड पॉजिशन पर आइआइएम कोलकाता है. शिखर पर आइआइएम अहमदाबाद काबिज है.

2000 के स्कोर पर की गयी है रैंकिंग
यह रैंकिंग कुल 2000 के स्कोर पर की गयी है. इनमें लर्निग एक्सपीरियंस( शैक्षणिक माहौल) के लिए आइएसएम को 184.3 अंक, लिविंग एक्सपीरियंस(रहने) के लिए 77.2 अंक, प्लेसमेंट के लिए 79, सेलेक्शन प्रोसेस( चयन प्रक्रिया) के लिए 133.1 अंक, फ्यूचर( भविष्य) के नजरिये के लिए 94.3 अंक , वास्तविक रैंक के लिए 603, अवधारणात्मक रैंक के लिए 351.5 व अनुभव आधारित रैंक के लिए 71.8 अंक मिले हैं.

कैसे किया गया सर्वे
सर्वे में मार्केटिंग एंड डेवलपमेंट रिसर्च एसोसिएटस की मदद ली गयी है. सर्वे में तीन अलग-अलग पद्धतियों को शामिल किया गया है. वास्तविक सर्वेक्षण में बी-स्कूलों को उनके डाटा के आधार पर 50 प्रतिशत वेटेज दिया गया है. सर्वे में लिविंग व लर्निग के अनुभव , एडमिशन प्रोसेस( दाखिले की प्रक्रिया) व प्लेसमेंट के रिकार्ड को भी देखा गया है.

अवधारणात्मक सर्वे में इंडस्ट्री और शिक्षा जगत दोनों के दोनों के छात्रों, अध्यापकों व रिक्रूटर्स की राय को आधार बनाया गया है. इसे सर्वेक्षण में 40 प्रतिशत वेटेज दिया गया है. सर्वे में 369 छात्रों,110 डीन और डायरेक्टर्स, 312 पूर्व छात्रों और 300 रिक्रूटर्स की राय ली गयी है. पहली बार सर्वे में पूरी छात्रों की भी राय ली गयी है. उन्हें एक प्रश्नावली भेजी गयी और पूछा गया कि उनके कॅरियर में स्कूल का कितना योगदान रहा और क्या उनकी डिग्री बाजार के जरूरतों के मुताबिक थी.