एमडीएम को ले जिला में बनेगी अनुश्रवण कमेटी

धनबाद: अनाथ विद्यालय का संचालन भी कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की तर्ज पर होगा. यहां 100 बच्चों के नामांकन का लक्ष्य है. इसके लिए सभी प्रखंडों से ऐसे बच्चों को चिह्न्ति करें. एमडीएम के अनुश्रवण के लिए जिला स्तर पर कमेटी का गठन किया जायेगा. एमडीएम सुचारु रूप से चले, इसमें गड़बड़ी पाये जाने पर […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | November 30, 2013 10:19 AM

धनबाद: अनाथ विद्यालय का संचालन भी कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की तर्ज पर होगा. यहां 100 बच्चों के नामांकन का लक्ष्य है. इसके लिए सभी प्रखंडों से ऐसे बच्चों को चिह्न्ति करें. एमडीएम के अनुश्रवण के लिए जिला स्तर पर कमेटी का गठन किया जायेगा. एमडीएम सुचारु रूप से चले, इसमें गड़बड़ी पाये जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होगी.

ये बातें डीएसइ बांकेबिहारी सिंह ने कही. वह शुक्रवार को एसएसएलएनटी बालिका उच्च विद्यालय में बैठक को संबोधित कर रहे थे. कहा कि ग्राम शिक्षा समिति एवं सिविल वर्क में दी गयी राशि का सामंजन जल्द से जल्द करें. सिविल कार्य की राशि के सामंजन के लिए टीम का गठन किया जायेगा.

भवन निर्माण नहीं होने पर ब्याज के साथ राशि की डीडी बना कर जिला कार्यालय में जमा करें. बुनियाद कार्यक्रम की ट्रेनिंग अच्छे से दी जाये, ताकि बच्चे का स्तर बेहतर बने. एसएसए की सभी योजनाओं के लिए अनुश्रवण टीम का गठन होगा. एलक्ष्पी ससमय जमा करें एवं बाल पंजी का संधारण भी जल्द करें. बैठक में डिप्टी डीएसइ एमके पांडेय, क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी अशोक सिंह, सभी बीइइओ, एडीपीओ विजय कुमार, एपीओ शैलेंद्र कुमार, सदानंद सिंह समेत सभी बीआरपी एवं सीआरपी मौजूद थे.

दस दिसंबर तक जमा करें डायस : डायस के लिए 10 दिसंबर तक का समय दिया गया है. डायस प्रपत्र भर कर जिला को भेजना है. स्कूल में पाठ योजना एवं पाठिका का अनुपालन हो. पुस्तकालय चले और बच्चों को किताबें पढ़ने को मिले. बैठक में सभी स्कूलों में शौचालय एवं पेयजल की मौजूदा स्थिति की रिपोर्ट भी देने को कहा गया है.

इन बिंदुओं पर चर्चा : निर्माण कार्य एवं कार्यक्रम मद में समायोजन, बाल पंजी का संधारण, डायस प्रपत्र की इंट्री, विद्यालय विकास योजना का निर्माण, बुनियाद कार्यक्रम का संचालन, विश्व विकलांगता दिवस पर खेलकूद का आयोजन, प्री इंट्रीगेशन कैंप, आउट ऑफ स्कूल बच्चों के लिए विशेष प्रशिक्षण, शिक्षक प्रशिक्षण, एसएमसी सदस्यों का प्रशिक्षण, शौचालय की उपलब्धता, अभिभावक परामर्श आदि.