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16 वर्षों में 100 आंदोलनात्मक कार्यक्रम

धनबाद. झारखंड और पश्चिम बंगाल के विभिन्न इलाकों में डीवीसी की परियोजना के कारण विस्थापित हुए लोगों की नौकरी की मांग को लेकर छोटे-बड़े आंदोलन होते रहे, मगर वर्ष 2006 में सामाजिक कार्यकर्ता रामाश्रय प्रसाद सिंह के नेतृत्व में घटवार आदिवासी महासभा के गठन के साथ आंदोलनों का दौर शुरू हुआ. महासभा के बैनर तले […]

धनबाद. झारखंड और पश्चिम बंगाल के विभिन्न इलाकों में डीवीसी की परियोजना के कारण विस्थापित हुए लोगों की नौकरी की मांग को लेकर छोटे-बड़े आंदोलन होते रहे, मगर वर्ष 2006 में सामाजिक कार्यकर्ता रामाश्रय प्रसाद सिंह के नेतृत्व में घटवार आदिवासी महासभा के गठन के साथ आंदोलनों का दौर शुरू हुआ. महासभा के बैनर तले श्री सिंह के नेतृत्व में जारी आंदोलन में मेधा पाटकर व स्वामी अग्निवेश तक शिरकत कर चुके हैं.

बीते 16 वर्षों के दौरान महासभा के बैनर तले श्री सिंह के नेतृत्व में झारखंड और पश्चिम बंगाल के चार जिलों जामताड़ा, धनबाद, पुरुलिया और बर्धमान के अलावा राजधानी रांची व राजधानी कोलकाता तक करीब 100 आंदोलनात्मक कार्यक्रम हो चुके हैं. इनमें सबसे उग्र आंदोलन 22 मई, 2010 को हुआ. ्उस दिन डीवीसी मैथन में प्रदर्शन हो रहा था, जिसमें हजारों की संख्या में ग्रामीण विस्थापितों ने हिस्सा लिया. फिर हालात कुछ ऐसे बने कि आंदोलन उग्र हो गया और विस्थापितों ने डीवीसी मैथन में जमकर तोड़ फोड़ की. उससे डीवीसी प्रबंधन ही नहीं, जिला प्रशासन भी सकते में आ गया. पुलिस द्वारा आंदोलन के तत्काल बाद महासभा के हरिपद पाल समेत 47 लोगों को गिरफ्तार किया गया. एक माह बाद सिंदरी से रामाश्रय बाबू की गिरफ्तारी भी हुई.

श्री सिंह के नेतृत्व में महासभा की ओर से वर्ष 2008 से डीवीसी की पंचेत इकाई में लगातार आंदोलन चलाया गया. इसके तहत पंचेत में ही घेरा डालो-डेरा डालो आंदोलन हुआ. 24 अगस्त, 2009 को करीब 300 विस्थापितों ने रांची स्थित राजभवन के समक्ष धरना दिया. 26 जनवरी, 2010 से पंचेत में अनिश्चितकालीन धरना शुरू हुआ, जो लगातार चार माह तक चला. इस दौरान आठ जिलों में सत्याग्रह का कार्यक्रम भी चला.

आंदोलन के दौरान ही एक मार्च, 2010 को पश्चिम बंगाल के रघुनाथपुर के रामकनाली ब्लॉक कार्यालय पर प्रदर्शन व धरना के दौरान बंगाल सरकार ने डीवीसी प्रबंधन से वार्ता कर मांगों की पूर्ति का आश्वासन दिया. 22 जनवरी, 2010 को धनबाद के तत्कालीन उपायुक्त की मौजूदगी में महासभा के नेताओं और डीवीसी के अधिकारियों के बीच बैठक हुई. उपायुक्त ने डीवीसी प्रबंधन को वंचित रहे गये विस्थापितों को भी लाभ देने का निर्देश दिया. फिर 22 मई, 2010 को महासभा के बैनर तले हजारों विस्थापितों ने डीवीसी मैथन में उग्र आंदोलन किया. इधर, 23 मार्च, 2014 को डीवीसी प्रबंधन के साथ हुई बैठक में तय हुआ था कि 23 मई तक विस्थापितों के नियोजन व मुआवजा समस्या का समाधान कर लिया जायेगा.

बैठक में सरकार की ओर से धनबाद के तत्कालीन एडीएम लॉ एंड ऑर्डर बीपीएल दास और डीवीसी के प्रबंधक एचआर, पंचेत एसके लाल आदि उपस्थित थे. समय सीमा पूरी होने के बाद भी नियोजन नहीं मिला. इसके बाद 23 मई, 2014 से घटवार आदिवासी महासभा के बैनर तले श्री सिंह के नेतृत्व में विस्थापितों का अनिश्चितकालीन धरना और अर्द्धनग्न प्रदर्शन शुरू हुआ. आंदोलन के मद्देनजर छह जून, 2014 को डीवीसी उच्च प्रबंधन ने विस्थापितों के साथ बैठक की, जिसमें नियोजन के संबंध में कार्रवाई तेज करने का आश्वासन दिया गया. 27 अप्रैल, 2015 को रणधीर वर्मा चौक पर भी महासभा के बैनर तले श्री सिंह के नेतृत्व में विस्थापितों ने अर्द्धनग्न स्थिति में धरना दिया था.

Prabhat Khabar Digital Desk
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