गांधी रोड की घटना. आखिरी कॉल बड़े भाई को, मैं आत्महत्या करने जा रहा हूं
धनसार थानांतर्गत गांधी रोड के नटराज टावर अपार्टमेंट के दूसरे माले के फ्लैट में रह रहे व्यवसायी जतीन मानेक (32) ने घर के सिलिंग फैन से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली.
धनबाद/धनसार : घटना के बाद पुलिस ने शनिवार को फ्लैट का दरवाजा तोड़ शव बरामद किया. वहां से पुलिस को दो सुसाइड नोट मिले हैं. उसमें कहा गया है कि ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर उन्हें यह कदम उठाना पड़ रहा है. घटना के वक्त जतीन घर में अकेले थे. चार दिन पूर्व पत्नी रोजी मानेक हीरापुर के एक क्लिनिक में इलाज के लिए भरती हुई थी. दो महीने पहले उसे एक बेटी हुई है.
पति की मौत की सूचना मिलते ही वह पूर्वाह्न 10 बजे अस्पताल में बिना किसी कोे बोले दो माह की बच्ची को लेकर अपार्टमेंट पहुंच गयी.
रात एक बजे किया भाई को फोन : जतीन शुक्रवार की रात एक बजे अपने घर पहुंचा और अपने बड़े भाई निशांत को फोन कर कहा कि मैं आज आत्महत्या कर लूंगा. निशांत अहमदाबाद में रहते हैं.
उन्हें जतीन की बात पर भरोसा नहीं हुआ. यकीन न करने का एक कारण यह भी था कि जतीन इससे पूर्व भी कई बार अपने परिजन से इस तरह मरने की बात कह चुका था. सुबह जब भाई ने जतीन के मोबाइल पर फोन किया तो फोन नहीं उठा. तब उन्होंने झरिया के किसी दोस्त भीखू भाई को फोन किया. सुबह साढ़े छह बजे भीखू ने जब जतीन के फ्लैट का दरवाजा खटखटाया तो अंदर से कोई जवाब नहीं मिला. उन्होंने अपार्टमेंट के लोगों को जगाया.
काफी खटखटाने के बाद भी जब दरवाजा नहीं खुला तो अपार्टमेंट के लोगों ने अस्पताल में भर्ती पत्नी से डुप्लीकेट चाभी मंगवायी. उससे भी दरवाजा नहीं खुला. क्योंकि दरवाजा अंदर से भी बंद था. लोगों ने धनसार पुलिस को सूचना दी. पुलिस ने दरवाजा तोड़ा तो देखा जतीन अपने कमरे के सिलिंग फैन से फंदे पर झूल रहा है. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.
दो साल पूर्व किया था प्रेम विवाह : जतीन ड्रिंकिंग वाटर का व्यवसाय करता था. पत्नी रोजी मानेक झरिया के एक निजी स्कूल की प्राचार्य है. दो साल पहले जतीन ने रोजी से प्रेम विवाह किया था.
दोनों अलग-अलग धर्म के थे. जतीन पहले झरिया फतेहपुर लेन में रहता था. दो वर्ष पूर्व ही गांधी रोड में नटराज टावर में फ्लैट लिया था. घटना की सूचना पाकर अहमदाबाद से भाई निशांत व मां शनिवार रात को धनबाद पहुंचे. मां 20 दिन पहले ही यहां से कच्छ (गुजरात) के गांव गयी थी. वहां से फिर अपने बड़े पुत्र के पास अहमदाबाद चली गयी थी.
