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63 हजार की जगह मात्र 10 हजार शौचालय बने

ओडीएफ. निगम के हाथ से निकल गया दो करोड़ का पुरस्कार इस बार राज्य सरकार ने स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए अनूठी पहल करते हुए अपने स्तर पर ‘झारखंड शहरी स्वच्छता पुरस्कार योजना’ की शुरुआत की है. योजना के तहत राज्य के सबसे स्वच्छ शहर को प्रथम पुरस्कार के रूप में दो करोड़ रुपये […]

ओडीएफ. निगम के हाथ से निकल गया दो करोड़ का पुरस्कार
इस बार राज्य सरकार ने स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए अनूठी पहल करते हुए अपने स्तर पर ‘झारखंड शहरी स्वच्छता पुरस्कार योजना’ की शुरुआत की है. योजना के तहत राज्य के सबसे स्वच्छ शहर को प्रथम पुरस्कार के रूप में दो करोड़ रुपये मिलेंगे, लेकिन धनबाद को यह लाभ मिलता नहीं दिख रहा है.
धनबाद : देश भर में 500 शहरों में स्वच्छता सर्वेक्षण चल रहा है. इसमें धनबाद समेत झारखंड के नौ शहर शामिल हैं. स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर राज्य सरकार भी काफी संजीदा है, क्योंकि पिछले साल इस प्रतियोगिता में धनबाद को देश का सबसे गंदा शहर चुना गया था.
वहीं, सबसे स्वच्छ वार्ड को दो लाख रुपये का प्रथम पुरस्कार दिया जायेगा. दूसरे स्थान पर रहनेवाले शहर को एक करोड़ और वार्ड को 1.50 लाख, तृतीय स्थान पर रहनेवाले शहर को 50 लाख और वार्ड को एक लाख का पुरस्कार दिया जायेगा. इसके अलावा स्वच्छ शहर को 25 लाख और स्वच्छ वार्ड को 50 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जायेगा. जो हालात है उससे लग रहा है कि इस बार धनबाद नगर निगम को सांत्वना पुरस्कार से ही संतोष करना पड़ेगा. क्योंकि ओडीएफ में धनबाद नगर निगम काफी पीछे रह गया है. 63 हजार के लक्ष्य के विरुद्ध मात्र दस हजार ही शौचालय बन पाये हैं, जबकि राज्य में चार शहर ओडीएफ हो चुके हैं.
मेयर से लेकर वार्ड पार्षद भी होंगे सम्मानित
नगर विकास विभाग द्वारा शहरी स्वच्छता पुरस्कार योजना के तहत 13 करोड़ 26 लाख 75 हजार रुपये की स्वीकृति दी गयी है. योजना के तहत स्वच्छ नगर के लिए मेयर व अन्य पदाधिकारी भी सम्मानित किये जायेंगे. इन्हें प्रशस्ति पत्र दिया जायेगा. स्वच्छ नगर पुरस्कार के लिए स्थानीय निकाय के मेयर, डीसी, डिप्टी मेयर, सीइओ, ओएसडी व सभी पार्षद को प्रशस्ति पत्र एवं शॉल देकर सम्मानित किया जायेगा. वहीं, स्वच्छ वार्ड पुरस्कार मिलने पर वार्ड स्वच्छता समिति के अध्यक्ष, सभी सदस्य व संबंधित सिटी मैनेजर को प्रशस्ति पत्र दिया जायेगा.
31 तक दावा कर सकते हैं ननि
स्वच्छ शहर या वार्ड की दावेदारी 31 जनवरी तक संबंधित नगर निकाय कर सकते हैं. इसके लिए संबंधित नगर निकाय के नगर आयुक्त या सीइओ या कार्यपालक पदाधिकारी को अपनी दावेदारी स्वयं करनी होगी. वहीं स्वच्छ वार्ड के लिए संबंधित वार्ड के पार्षद अपनी निकाय के माध्यम से दावेदारी कर सकते हैं. नगर निकाय और वार्ड के प्रतिनिधियों को दावेदारी शहरी विकास अभिकरण (सुडा) में करना होगा.
ट्रांसफर-पोस्टिंग के कारण समय पर काम शुरू नहीं हो पाया. इसके कारण धनबाद नगर निगम ओडीएफ नहीं हो सका. इस बार निगम को यह पुरस्कार नहीं मिल पायेगा. हालांकि 31 मार्च तक निगम को ओडीएफ का लक्ष्य रखा गया है. अगले साल पुरस्कार के लिए धनबाद नगर निगम दावेदारी करेगा.
प्रदीप कुमार प्रसाद, अपर नगर आयुक्त
Prabhat Khabar Digital Desk
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