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नवजात को बचाने वाली महिला ने उसे कारा रांची भेजने का विरोध किया, कहा जान दे दूंगी, बच्ची नहीं दूंगी

धनबाद : एक ओर ममता है, तो दूसरी ओर कानून. चंपा को झाड़ी में लावारिस बच्ची मिली तो उसने उसे सीने से लगा लिया. लेकिन कानून का हवाला देकर बच्ची उससे ली जा रही है. लेकिन चंपा इसके लिए तैयार नहीं है. चंपा की ममता देखकर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य भी परेशान हैं. […]

धनबाद : एक ओर ममता है, तो दूसरी ओर कानून. चंपा को झाड़ी में लावारिस बच्ची मिली तो उसने उसे सीने से लगा लिया. लेकिन कानून का हवाला देकर बच्ची उससे ली जा रही है. लेकिन चंपा इसके लिए तैयार नहीं है. चंपा की ममता देखकर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य भी परेशान हैं. सीडब्ल्यूसी की ओर से बच्ची को कारा रांची (सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स ऑथिरिटी) भेजने की तैयारी है. फिलहाल बच्ची पीएमसीएच की एनअाइसीयू में इलाजरत है.
गत 27 मई (शनिवार की सुबह) को भाैंरा की डुमरी बस्ती के पास झाड़ी में एक नवजात बच्ची फेकन तुरी की पत्नी चंपा देवी को मिली. वह बच्ची को उठाकर अपने घर ले आयी. सीडब्ल्यूसी के पदाधिकारियों ने नवजात को इलाज के लिए पीएमसीएच में भेजा. बच्चा के दाहिने कान का कुछ हिस्सा चीटियों ने काट खा लिया था. इसके बाद बच्ची एनआइसीयू में भरती है. इधर, पीएमसीएच के डॉक्टरों ने एक-दो दिन यहां बच्ची का इलाज करने की बात कही है.
घर छोड़ अस्पताल में पड़ी है चंपा
चंपा नवजात को किसी शर्त पर छोड़ना नहीं चाहती है. वह घर छोड़ कर तीन दिनों से पीएमसीएच में एनआइसीयू के बाहर पड़ी है. बीच-बीच में चंपा के घरवाले आ रहे हैं. चंपा ने बताया कि उसे कानून नहीं आता है. वह बच्ची को अपनी बेटी बनाकर पालेगी. बच्ची को उससे छीना गया तो वह अपनी जान दे देगी. उसने बताया कि झाड़ियों से उठाकर उसने बच्ची की जान बचायी है. चंपा के समर्थन में परिवार वाले भी हैं. पति फेकन तुरी ने बताया कि उसके दो बच्चे करण (12) और श्रवण (8) हैं. दोनों स्कूल में पढ़ते हैं. फेकन ठेका-पट्टा का काम करता है.
चंपा को नहीं दे सकते बच्ची : सीडब्ल्यूसी
सीडब्ल्यूसी के सदस्य शंकर रवानी ने कहा कि चंपा को बच्ची नहीं दी जा सकती है. ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. हम नियम-कानून में बंधे हैं. लावारिस बच्चे सरकार के होते हैं, इसलिए बच्ची को एक-दो दिनों में ठीक होते ही रांची के कारा संस्था के हवाले कर दिया जायेगा. चंपा अगर बच्ची रखना चाहती है तो सरकारी प्रक्रिया के तहत रांची जाकर कारा में आवेदन करे. वहां से बच्ची को ले सकते हैं. नवजात को रांची ले जाने की तैयारी हो चुकी है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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