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Dhanbad News : कतरास झींझी पहाड़ी बूढ़ा बाबा शिव मंदिर का होगा जीर्णोद्धार, राज्य को सौंपी गयी रिपोर्ट

धरोहर को बचाने के लिए राज्य पर्यटन संवर्द्धन परिषद में भेजा गया प्रस्ताव, जिला पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने किया निरीक्षण, पर्यटन स्थल बनाने से स्थानीय लोग मिलेगा रोजगार

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से कतरास के झींझी पहाड़ी पंचायत स्थित बूढ़ा बाबा शिव मंदिर को नौवीं शताब्दी का धरोहर बताते हुए इसे संरक्षित करने को कहा गया है. इसे लेकर जिला पर्यटन विभाग के नोडल पदाधिकारी उमेश लोहरा ने मंदिर का निरीक्षण कर रिपोर्ट राज्य पर्यटन संवर्द्धन परिषद में भेज दी है. रिपोर्ट में नोडल पदाधिकारी ने कहा है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने इस मंदिर को एक हजार साल पुराना नौवीं शताब्दी का बताया है. इसलिए राज्य सरकार ने इसे संरक्षित करने का फैसला लिया है. रख-रखाव के अभाव में दिन-प्रतिदिन इस मंदिर की स्थिति खराब हो रही है. पहले यहां कई लोग पूजा पाठ करने आते थे. हालत खराब होने की वजह से अब लोगों का आना जाना भी कम हो गया है. बिजली की सुविधा नहीं होने की वजह से अंधेरा होने के बाद यहां आने से बचते हैं. मंदिर के पत्थर भी खराब हो रहे हैं. उनमें भी सीलन हो चुकी है और काई जम चुकी है. बरसात के मौसम में मंदिर से पानी चूने लगता है.

जिला टीम ने किया था मंदिर का निरीक्षण :

जिला पर्यटन विभाग के नोडल पदाधिकारी उमेश लोहरा व जिला पर्यटन विशेषज्ञ संतोष कुमार के नेतृत्व में एक टीम ने इस सप्ताह मंदिर का निरीक्षण किया था. मंदिर के हाल का आकलन करते हुए. टीम ने राज्य स्तरीय टीम को रिपोर्ट भेज दी है. मंदिर को संरक्षित करने के लिए जिला पर्यटन संवर्धन परिषद (डीटीपीसी) ने मंजूरी दे दी है. मंदिर को राज्य पर्यटन संवर्धन परिषद (एसटीपीसी) से मंजूरी के लिए जिला पर्यटन विभाग प्रस्ताव भेज दिया है. वहां से पास होने के बाद मंदिर को पर्यटन स्थान घोषित कर उसे संरक्षित किया जाएगा.

पत्थरों से हुआ है मंदिर का निर्माण :

नौवीं शताब्दी के इस मंदिर के निर्माण में पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है. मंदिर के अंदर मौजूद शिवलिंग को ओड़िशा के कलिंगा के एक मंदिर से मिलता-जुलता बताया गया है. इस मंदिर की ऊंचाई 28 फीट, मुख्य द्वार 3.3 फीट का है.

मंदिर कमेटी करती है देख-रेख :

अभी वर्तमान में श्रीश्री बूढ़ा बाबा शिव मंदिर सेवा ट्रस्ट द्वारा मंदिर की देख-रेख की जाती है, जो भी खर्च आता है, उसे कमिटी के लोग आपस में बांट लेते है. मंदिर में आने वाले दान से भी मंदिर की देख-रेख का खर्च निकलता है. वर्तमान में ट्रस्ट के अध्यक्ष एलपी महतो, उपाध्यक्ष शंकर महतो, महासचिव गणेश कुमार महतो, सचिव विशाल कुमार महतो, कोषाध्यक्ष अशोक कुमार महतो है.

पर्यटन स्थान बनने से मिलेगा रोजगार :

नोडल पदाधिकारी ने बताया कि अभी यहां का हाल कुछ अच्छा नहीं है. लोग रोजगार के लिए बाहर जा रहे है. अगर यहां विभाग द्वारा पर्यटन स्थान बनाया जाता है, तो यहां के स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा. इससे लोग अपना घर छोड़ बाहर जाने को मजबूर नहीं होंगे.

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Prabhat Khabar News Desk
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