राशि का दुरुपयोग नहीं, तो ये और क्या‍

अनदेखी. तीन करोड़ की लागत से बने मातृ-शिशु अस्पताल भवन में लटका है ताला... भवन के आसपास झाड़ियां उग आयी, बीम छड़ छाेड़ने लगी दुमका : उपराजधानी दुमका में लगभग सात से बनकर तैयार मातृ शिशु अस्पताल अब तक चालू नहीं हो पाया है. 30 बेड वाले इस अस्पताल को बनाने में लगभग तीन करोड़ […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | August 26, 2017 4:23 AM

अनदेखी. तीन करोड़ की लागत से बने मातृ-शिशु अस्पताल भवन में लटका है ताला

भवन के आसपास झाड़ियां उग आयी, बीम छड़ छाेड़ने लगी
दुमका : उपराजधानी दुमका में लगभग सात से बनकर तैयार मातृ शिशु अस्पताल अब तक चालू नहीं हो पाया है. 30 बेड वाले इस अस्पताल को बनाने में लगभग तीन करोड़ रुपये खर्च किये गये थे. लगभग हर दिन इसमें ताला लटका रहता है. आज तक इस भवन का उपयोग इक्का-दुक्का कार्यक्रम या प्रशिक्षण के लिये होता आया है. वहीं उचित देखरेख के अभाव में भवन की दीवारों में दरारें भी दिखने लगी है और बीम छड़ छोड़ने लगी है. चहुंओर घनी झाड़ियां उग आयी है.
पद सृजन में लगा लंबा वक्त, अब पदस्थापन का इंतजार
आवाज उठने के बाद इस मातृ शिशु अस्पताल के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने पिछले वित्तीय वर्ष के अंत में तमाम मातृ-शिशु अस्पतालों के लिए पदों का सृजन कर दिया था. चालीस से अधिक पद इस अस्पताल के लिए सृजित किये गये थे, जिनमें स्त्री रोग विशेषज्ञ के एक, शिशु रोग विशेषज्ञ के एक, चिकित्सा पदाधिकारी के चार, एनेस्थेसियन के एक तथा ए ग्रेड नर्स के 16 पद शामिल हैं. हालांकि इन सृजित पदों के बाद अब पदस्थापन में कितना वक्त लगेगा, यह बतानेवाला कोई नहीं है.
स्त्री रोग विशेषज्ञ – 01
शिशु रोग विशेषज्ञ – 01
चिकित्सा पदाधिकारी – 04
निश्चेतक – 01
नर्स ए ग्रेड – 16
लैब टेक्निशियन – 01
ओटी अटेंडेंट – 01
लिपिक – 01
वार्ड अटेंडेंट – 04
ड्रेसर – 01
गार्ड – 04
स्वीपर – 06
काश सदर अस्पताल में बनता भवन
इस अस्पताल भवन का नियमित उपयोग हुआ होता, तो भवन की ऐसी स्थिति नहीं होती. हालांकि यह कर्मियों के आवासीय परिसर में बना है, सदर अस्पताल में होता, तो दूसरे कार्य में भी उपयोग होता.