प्रतिनिधि, दुमका सिमटता जल स्तर,उपर से कचरे का प्रवाह के कारण तालाबों का अस्तित्व खत्म होता जा रहा है. इंसानों की बात तो छोडि़ए इसका पानी जानवरो के लायक भी नहीं रहा है. तालाब हमारी संस्कृति एंव समृद्धि का परिचायक रहा है. नदियों के बाद तालाबों का स्थान आता है. लेकिन आज अगर इस ओर नजर डालें तो आप भी सोचने पर मजबूर हो जायेगे. हालात इतने खराब हो गये है की पता ही नही चलता कि तालाब में कचरा है या कचरे में तालाब. शहर के कई तालाब जिसमें बड़ा बॉध,खूंटा बॉध, लाल पोखरा, बन्दरजोड़ी,रसिकपूर आदि तालाबों में गंदगी की भरमार है और यह दिन ब दिन बढ़ती जा रही है. आये दिन धार्मिक उत्सवों के बाद मूर्तियों एंव फूलों के विसर्जन के कारण यह और भी प्रदूषित होती जा रही है. ……………………………क्या कहते है समाजसेवी’सिर्फ सरकार एवं नगरपालिका पर निर्भर रहने से बात नहीं बनेगी, बल्कि इसके लिए लोगों को भी जागरूक होना होगा. श्रमदान के द्वारा हर घाटों की सफाई की जानी चाहिए. गिरते जल स्तर के कारण तालाबों की खुदाई पांच से छ:ह फीट करनी होगी.सत्येंन्द्र सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता’धार्मिक आस्था से जुड़े इन तालाबों की सफाई को लेकर प्रशासन सजग नही है. तालाबों की सफाई के लिए पैसे तो खर्च होते हैं, लेकिन उसकी उपयोगिता सुनिश्चित नहीं करायी जाती. सफाई का काम खानापूरी बनकर रह जाता है. अक्सर लूटखसोट ही ऐसी योजना में हुआ है. मामले की जांच होनी चाहिए.’पिंटु अग्रवाल, केंद्रीय सदस्य, जेवीएम…………………………..फोटो 04 दुमका तालाब 10, 11, 12, 13 व 14 10. खुटाबांध तालाब11. बंदरजोड़ी तालाब12. लाल पोखर 13. बड़ाबांध तालाब14. रसिकपुर तालाब……………………………..
खतरे में है तालाबों का अस्तित्व// तालाब बना कचरा फेंकने का स्थान
प्रतिनिधि, दुमका सिमटता जल स्तर,उपर से कचरे का प्रवाह के कारण तालाबों का अस्तित्व खत्म होता जा रहा है. इंसानों की बात तो छोडि़ए इसका पानी जानवरो के लायक भी नहीं रहा है. तालाब हमारी संस्कृति एंव समृद्धि का परिचायक रहा है. नदियों के बाद तालाबों का स्थान आता है. लेकिन आज अगर इस ओर […]
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