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प्रशासन की निष्क्रियता से मिहिजाम में काटी जा रही कीमती लकड़ियांजहां आज पूरा विश्व ग्लोबल वार्मिंग को लेकर चिंतित है वहीं यहां जम कर हो रहा दोहनइलाके के कई गोदामों में आज भी डंप है लाखों की कीमती लकड़ियांफोटो : 31 जाम 13 ठेला पर लादे लकडी,14 कटी हुई लकडीप्रतिनिधि, मिहिजाम वन विभाग और पुलिस […]

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प्रशासन की निष्क्रियता से मिहिजाम में काटी जा रही कीमती लकड़ियांजहां आज पूरा विश्व ग्लोबल वार्मिंग को लेकर चिंतित है वहीं यहां जम कर हो रहा दोहनइलाके के कई गोदामों में आज भी डंप है लाखों की कीमती लकड़ियांफोटो : 31 जाम 13 ठेला पर लादे लकडी,14 कटी हुई लकडीप्रतिनिधि, मिहिजाम वन विभाग और पुलिस की निष्क्रियता के कारण लकड़ी के अवैध व्यापार से जुड़े लोगों का धंधा खूब फल-फूल रहा है. एक तरफ जहां जंगल का क्षेत्र घटता जा रहा है. वहीं दूसरी तरफ लकड़ियो की अवैध तस्करी से जुड़े लोग मालामाल हो रहे हैं. बदले में पर्यावरण असंतुलन और घटते जलस्तर से लोग परेशान हो रहे हैं. पश्चिम बंगाल में खपायी जा रही कीमती लकड़ियांमिहिजाम के ग्रामीण इलाका चन्द्रडीपा, नीलदहा, लाधना सहित जिले के फतेहपुर, कुंडहित, नाला, नारायणपुर के वन आच्छादित इलाके से रोजाना लकड़ियों की अवैध कटाई कर तस्कर सीमावर्ती पश्चिम बंगाल के आरा मीलों में कीमती लकड़ियों को धड़ल्ले से खपा रहे हैं. सीमावर्ती इलाका रूपनारायणपुर, जेमारी, अलनाडीह, श्याडीह, मैथन के अलावा नियामतपुर, आसनसोल में स्थित आरा मिलों में तस्करी के इन लकड़ियों से खूब चांदी काटी जा रही है. खुल्लेआम वाहनों से बंगाल पहुंचती है लकड़ियांसूत्रों की माने तो मिहिजाम के मुख्य पथ होकर रोजाना पिकअप वैन, रिक्शा व अन्य वाहनों के माध्यम से काटी गयी कीमती लकड़ियों को लाद कर बंगाल ले जाया जाता है. लकड़ी के अवैध व्यापार में शामिल तत्वों ने नगर इलाके में अपने गोदाम तक बना रखे हैं. जहां से लकड़ियों को बंगाल खपाया जाता है. तस्करी की जा रही लकड़ियों में हरे एवं फलदार वृक्ष के अलावा औषधि पेड़, शीशम, सागवान, आम, जामुन, कटहल के पेड़ शामिल हैं. पर्यावरण की फिक्र नहींपेड़ों की चोरी-छिपे जारी अनवरत कटाई से पर्यावरण को खासा नुकसान पहुंच रहा है. वहीं पेड़ों की कटाई से घट रहे वन क्षेत्र से बारिस लगातार कम हो रही है. जिससे किसानों की खेती भी प्रभावित हो रही है. जामताड़ा जिले की अर्थव्यवस्था खेती पर आधारित है. समय पर खेतों को पानी नहीं मिलने से फसलें नष्ट हो रही है. फसलों के प्रभावित होने से किसानों के माली हालात बिगड़ रहे हैं. किसान कर्ज में डूब रहे हैं. मगर इसकी फिक्र करने वाला कोई नहीं है. जब पूरा विश्व ग्लोबल वार्मिग एवं पर्यावरण असंतुलन को लेकर चिंतित है. वहीं इसकी रक्षा के लिए विश्वस्तर पर इससे बचने के उपाय ढूढ़े जा रहे है. इससे इतर इस क्षेत्र की व्यवस्था उलट है. विभाग से लेकर प्रशासन चुप्पी साधे और है और मौन समर्थन ने धड़ल्ले से चल रहा अवैध धंधा. ऐसा नहीं है कि मामला विभाग के संज्ञान में नहीं है. बस लगातार अनदेखी से पर्यावरण का जमकर दोहन हो रहा है.

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