108 कलश की निकली भव्य शोभा यात्रा

आस्था. मंदिर में अधिवास पूजा के साथ माता तारा की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा शुरू महिलाएं कलश लेकर गाजे-बाजे के साथ कीं नगर भ्रमण वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच माता की मूर्ति का हुआ प्रतिष्ठापन आज होगी माता तारा की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा बासुकिनाथ : बाबा फौजदारीनाथ दरबार में माता तारा की नयी संगमरमर की […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

आस्था. मंदिर में अधिवास पूजा के साथ माता तारा की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा शुरू

महिलाएं कलश लेकर गाजे-बाजे के साथ कीं नगर भ्रमण
वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच माता की मूर्ति का हुआ प्रतिष्ठापन
आज होगी माता तारा की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा
बासुकिनाथ : बाबा फौजदारीनाथ दरबार में माता तारा की नयी संगमरमर की प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा विधि विधान के साथ शुरू हुआ. पंडित ओम एवं दिवाकर झा के नेतृत्व में धार्मिक अनुष्ठान शुरू हुआ. इससे पहल मंदिर प्रांगण से 108 कलश लेकर महिलाओं ने गाजे-बाजे के साथ नगर भ्रमण किया गया. माता तारा की भव्य प्रतिमा का भी भ्रमण कराया गया. ग्यारह पंडितों के वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच माता की मूर्ति का प्रतिष्ठापन शुरू हुआ है.
पंडितों ने बताया कि मूर्ति अधिष्ठापन हेतु रविवार को अधिवाश पूजा की गयी. पंडितों के मंत्र ध्वनि के बीच गणेश अंबिका पूजन, मंडप पूजन, जलाधिवास, अन्नाधिवास, गन्नाधिवास पूजा वैदिक रीति से संपन्न की गयी. पंडा धर्मरक्षिणी सभा के अध्यक्ष मनोज पंडा ने बताया कि सोमवार को माता तारा की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हो जायेगा. मंत्र उच्चारण से संपूर्ण मंदिर परिसर गुंजायमान रहा. पूरे नगर के लोग भक्तिभाव में डूबे रहे. और माता रानी की जायकारे लगाते रहे.
कलश शोभा यात्रा में शामिल महिलाएं एवं अन्य व मंदिर में अधिवास पूजा करते पंडित. फोटो । प्रभात खबर
बनारस से मंगायी गयी हैं 13 देवी देवताओं की मूर्तियां
श्रावणी मेला से पूर्व मंदिर परिसर स्थित सभी खंडित मूर्ति को बदलने का प्रस्ताव न्यास समिति की बैठक में लिया गया था. बनारस से 13 देवी देवताओं की संगमरमर की आकर्षक मूर्ति लाया गया है. इसके बावजूद सिर्फ माता तारा की मूर्ति का प्राण प्रतिष्ठा कराया गया. ज्ञात हो कि शास्त्रों में खंडित मूर्ति की पूजा वर्जित है. मंदिर प्रबंधन का कहना है कि मूर्ति बनारस से मंगवाया गया है. मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का कार्य पंडा धर्मरक्षिणी सभा के नेतृत्व में किया जाना है. शेष सभी मूर्ति का प्राण प्रतिष्ठा सावन महीने के बाद किया जायेगा. इस बार फिर सावन के महीने में कांवरियों को खंडित प्रतिमा का ही पूजा करना होगा.
ये मूर्तियां आयी है
मंदिर प्रबंधन के अनुसार बनारस से माता काली, भगवान शंकर, माता अन्नपूर्णा भगवान शंकर सहित, माता लक्ष्मी, भगवान विष्णु, कार्तिकेय, कीर्तिमुख, तीन बसाहा एवं माता तारा की संगमरमर की आकर्षक मूर्ति लायी गयी है. वहीं कुछ लोगों का कहना है कि सभी मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा एक ही साथ हो जाना चाहिए था.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

👤 By Prabhat Khabar Digital Desk

Prabhat Khabar Digital Desk

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >