बहरागोड़ा : बहरागोड़ा के नटियापाल में सुवर्णरेखा नदी के तट से 30-40 फीट की दूरी पर खनन शर्तों की धज्जियां उड़ाते हुए मजदूरों की जान जोखिम में डाल कर क्वार्ट्ज पत्थरों का खनन करवाया जा रहा था. प्रशासन को अबतक खनन कराने वाले का नाम पता नहीं चला है. पुलिस व प्रशासन अपने स्तर से जांच कर रही है. 27 अगस्त को घाटशिला के अनुमंडलाधिकारी संतोष कुमार गर्ग और एसडीपीओ संजीव कुमार बेसरा ने क्वार्ट्ज पत्थर से लदा एक ट्रक और एक जेसीबी जब्त कर चार लोगों को हिरासत में लिया था.
पदाधिकारी ने बताया कि वे जब खनन स्थल पर पहुंचे, तो खदान में पत्थर तोड़ रहे मजदूरों के पैरों में बूट, सिर पर हेलमेट कैप और हाथों में दस्ताने नहीं थे. पैरों में हवाई चप्पल पहने और सिर पर गमछा बांधे 40 से 50 फीट गहरे खदान में पत्थर तोड़ रहे थे. खनन की शर्तों के मुताबिक लीज धारक को मजदूरों के लिए बूट, हेलमेट कैप और दस्ताने देने का प्रावधान है, ताकि मजदूर सुरक्षित रहे. बताया जाता है कि उक्त खनन स्थल पर पांच वर्षों में तीन मजदूरों की मौत भी हुई, लेकिन मामले का दबा दिया गया. खनन स्थल पर फस्ट एड की व्यवस्था नहीं थी.
खनन स्थल पर बोर्ड नहीं
खनन शर्तों के मुताबिक खनन स्थल पर बोर्ड लगाने का प्रावधान है. बोर्ड में लीज धारक का नाम, खनन का एरिया, मजदूरी की दर आदि अंकित करने का प्रावधान है. मगर उक्त स्थल पर कोई बोर्ड नहीं पाया गया. खनन की शर्त के मुताबिक लीज धारक को जितनी जमीन खनन के लिए लीज ली गयी है, को पिलर गड़वा कर चिन्हित कर देना है. यहां खनन की भूमि चिन्हित नहीं पायी गयी.
गड्ढों की फीलिंग नहीं, पौधरोपण भी नहीं: खनन की शर्तों के मुताबिक लीजधारक को पत्थर खनन से हुए गड्ढों में मिट्टी की फिलिंग करवानी है. उस पर पौधरोपण करवाना है. उक्त स्थल पर पत्थर खनन से बने 40-50 फीट गहरे कई गड्ढों में पानी भरा था. गड्ढों में मिट्टी की फीलिंग नहीं की गयी थी. खनन स्थल पर कहीं भी पौधरोपण नहीं किया गया था.
खनन शर्तों का किया गया उल्लंघन, वैध या अवैध की चल रही जांच
हेलमैट कैप, जूते और दस्ताना के बिना काम करते मजदूर
खनन से बने गड्ढे में नहीं की गयी मिट्टी फीलिंग.
एसडीओ ने डीसी को सौंपी क्वार्ट्ज खनन की रिपोर्ट
