अांबेडकर की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है : भंते आनंद

शहर के सहिजना मोड़ पर अांबेडकर की नयी प्रतिमा का अनावरण किया गया... गढ़वा : करीब आठ महीने बाद शहर के सहिजना मोड़ पर डॉ भीम राव अांबेडकर की आदमकद प्रतिमा अनावरण किया गया़ आठ माह पहले लोकसभा चुनाव के ठीक पहले 23 फरवरी को यहां स्थापित अांबेडकर की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया गया […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | October 31, 2019 12:24 AM

शहर के सहिजना मोड़ पर अांबेडकर की नयी प्रतिमा का अनावरण किया गया

गढ़वा : करीब आठ महीने बाद शहर के सहिजना मोड़ पर डॉ भीम राव अांबेडकर की आदमकद प्रतिमा अनावरण किया गया़ आठ माह पहले लोकसभा चुनाव के ठीक पहले 23 फरवरी को यहां स्थापित अांबेडकर की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था़ लोकसभा में क्षतिग्रस्त हुई प्रतिमा को बदल कर नयी प्रतिमा को विधानसभा चुनाव से ठीक पहले स्थापित कर दिया गया.

उत्तरप्रदेश के चोपन से पहुंचे बौध भिक्षु भंते आनंद व गया से पहुंचे. भंते सुनील पाल ने पट्टिका हटाकर इसका अनावरण किया़ इसको लेकर प्रतिमा स्थल पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रतिमा निर्माण समिति के अध्यक्ष अशर्फी राम ने की. इस मौके पर बोलते हुए भंते आनंद ने कहा कि डॉ अांबेडकर मानवता के सच्चे पुजारी थे. उन्होंने संविधान बनाकर सामाजिक उत्पीड़न, सामाजिक न्याय व समानता का संदेश दिया है.

पूर्व के काल ही नहीं बल्कि वर्तमान समय में भी उनके सिद्धांतों की प्रासंगिकता बनी हुई है. उन्होंने कहा कि आज राष्ट्र की मांग भाईचारा व समता मूलक समाज स्थापित करने तथा विषमता को दूर करने का है. उन्होंने कहा कि अांबेडकर के वजह से ही संविधान के अनुच्छेद में समानता को मौलिक अधिकार के रूप में जोड़ा गया है. इससे आज एकरूपता देखने को मिल रही है़ उन्होंने कहा कि नये भारत व समाज का निर्माण सभी को मिलकर प्रयास करने से ही संभव है. कार्यक्रम में पूर्व सांसद घुरन राम ने कहा कि एक साजिश के तहत कुछ लोगों ने प्रतिमा को चुनाव के ठीक पहले क्षतिग्रस्त कर दिया था. लेकिन इस तरह की असामाजिक कार्य से अांबेडकर की महत्ता कम होनेवाली नहीं है. अांबेडकर के सिद्धांतों को माननेवाले लोगों की संख्या करोड़ों में है और यह लगातार बढ़ रही है़ कार्यक्रम का संचालन माले नेत्री सुषमा मेहता ने किया.

इस अवसर पर अजा आयोग के चेयरमैन शिवधारी राम, बसपा नेता वीरेंद्र साव, कांग्रेस जिलाध्यक्ष अरविंद तूफानी, कालीचरण मेहता, किशोर कुमार, जमीरूद्दीन अंसारी, याकूब इकबाल, रामनरेश राम, मुंद्रिका राम, मुखराम भारती, राजन मेहता, गोपाल राम, ब्रजकिशोर राम, रघुराई राम, रामप्रवेश राम सहित अन्य लोग उपस्थित थे.