profilePicture

तीन महीने से विभागों का चक्कर लगा रहा दिव्यांग

गढ़वा : गढ़वा जिले के सगमा निवासी दिव्यांग नरेंद्र विश्वकर्मा पिछले तीन महीने से सहायता के लिये विभागों का चक्कर लगा रहा है़ लेकिन सभी विभाग एक-दूसरे की जिम्मेवारी बताते हुए अपना पल्ला झाड़ ले रहे हैं. फरवरी से लगातार विभागों के चक्कर काटने के बाद नरेंद्र सरकारी सहायता लेने में सफल नहीं हो पाया़ […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | May 4, 2017 9:02 AM
गढ़वा : गढ़वा जिले के सगमा निवासी दिव्यांग नरेंद्र विश्वकर्मा पिछले तीन महीने से सहायता के लिये विभागों का चक्कर लगा रहा है़ लेकिन सभी विभाग एक-दूसरे की जिम्मेवारी बताते हुए अपना पल्ला झाड़ ले रहे हैं. फरवरी से लगातार विभागों के चक्कर काटने के बाद नरेंद्र सरकारी सहायता लेने में सफल नहीं हो पाया़ गौरतलब है कि नरेंद्र का बायां पैर 24 सिंतबर 2016 को हुई ट्रक दुर्घटना के बाद काटना पड़ा था. वह अपने दो छोटे बच्चे एवं परिवार का गुजारा करने में असमर्थ है़ उसके घर भुखमरी की स्थिति बन गयी है़
नरेंद्र ने जब अपने पैर पर खड़े होने के लिये कृत्रिम पैर लगवाने के लिये अस्पताल में संपर्क किया, तो उसे बताया गया कि कृत्रिम पैर लगाने में उसे 1.25 लाख से 1.50 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ेंगे. इसके बाद नरेंद्र ने सबसे पहले अपने सांसद बीडी राम से सहायता के लिये गुहार लगायी़ बीडी राम ने उसे गढ़वा सिविल सर्जन के पास जाने को कहा़ साथ ही उन्होंने सीएस के पास पत्र लिखकर नरेंद्र को सहायता करने के लिये कहा़ नरेंद्र ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि जब वह सांसद के निर्देश पर सिविल सर्जन के पास गया, तो उसे बताया गया कि वह गलत जगह आ गया है़ उसे इसके लिये समाज कल्याण विभाग में जाना चाहिए. इसके बाद नरेंद्र ने समाज कल्याण पदाधिकारी को आवेदन देकर अपना कृत्रिम पैर लगाने के लिये गुहार लगायी़
समाज कल्याण पदाधिकारी ने इसके आलोक में झारखंड के समाज कल्याण बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के निदेशक को नरेंद्र के सहायता के लिये सिफारिश की़ 28 फरवरी के लिखे इस पत्र के करीब डेढ़ महीने तक कोई कार्रवाई नहीं होने के बाद 20 अप्रैल को नरेंद्र ने पुन: सहायता के लिये गढ़वा उपायुक्त को आवेदन दिया़
उपायुक्त ने 21 अप्रैल 2017 को पुन: नरेंद्र को सहायता करने के लिये गढ़वा सिविल सर्जन को निर्देशित किया़ सिविल सर्जन कार्यालय से पुन: नरेंद्र को कहा गया कि वह गलत जगह प्रयास कर रहा है़ स्थिति यह है कि नरेंद्र आज तक सरकारी विभागों का चक्कर लगा रहा है, लेकिन अभी तक उसे कोई सहायता नहीं मिली़

Next Article

Exit mobile version