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साप्ताहिक समीक्षा से आया बदलाव

विकास कार्य के परंपरागत तौर-तरीके कहीं न कहीं भ्रष्टाचार के कीटाणु को पनपने का मौका देते हैं. इस तमीज और तेवर को बदले बिना तंत्र में पनपती अराजकता पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता है. इसी को देखते हुए विकास योजनाओं की नियमित साप्ताहिक समीक्षा से डीडीसी ने एक नयी मॉनीटरिंग सिस्टम विकसित की. जंग […]

विकास कार्य के परंपरागत तौर-तरीके कहीं न कहीं भ्रष्टाचार के कीटाणु को पनपने का मौका देते हैं. इस तमीज और तेवर को बदले बिना तंत्र में पनपती अराजकता पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता है. इसी को देखते हुए विकास योजनाओं की नियमित साप्ताहिक समीक्षा से डीडीसी ने एक नयी मॉनीटरिंग सिस्टम विकसित की. जंग लगे इस तंत्र में अब बदलाव की आहट सुनायी पड़ने लगी है.
गिरिडीह : विकास योजनाओं में गड़बड़ी और कागजी खानापूरी कर सरकारी राशि की बंदरबांट जैसे सरकारी कामकाज का स्थायी भाव है. डीडीसी किरण कुमारी पासी के नेतृत्व में जिला में पहली बार शुरू हुई प्रखंडों की साप्ताहिक समीक्षा इसी कार्यशैली पर एक प्रहार है. डीडीसी की पहल से अब योजनाओं में मनचाहा खेल करने वालों पर शिकंजा कसता जा रहा है. दूसरी तरफ इसमें गड़बड़ी पैदा करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों पर हो रही लगातार कार्रवाई से अब विकास विरोधी तत्वों के हौसले भी पस्त होते जा रहे हैं.
ऐसे टूटी जड़ता : डीडीसी की सक्रियता से जिला में कच्छप गति से चल रही योजनाओं में तेजी के साथ-साथ नयापन भी आया है. प्रखंडों में रोजगार सेवकों, कनीय अभियंताओं और अन्य कर्मियों के साथ सप्ताहिक बैठक कर बीडीओ की ओर से की जाने वाली समीक्षा के बाद जिला को संतोषजनक प्रतिवेदन नहीं आने पर यह पहल हुई है.
प्रत्येक सप्ताह बीपीओ, कनीय अभियंताओं, योजना संबंधी फाइल की डीलिंग करने वाले लेखापाल और अन्य अधिकारियों के साथ जिला स्तर पर होने वाली इस बैठक से पंचायत की योजनाओं से अब सीधे तौर पर जिला प्रशासन अवगत हो रहे हैं. जिला प्रशासन के इस क्रियाकलाप से प्रखंडों से अधिकारी अब दिगभ्रमित किये जाने वाले प्रतिवेदन नहीं भेज पा रहे. जिला अब प्रत्येक गतिविधि से सीधे तौर पर योजनाओं से अवगत हो रहे हैं. इस नयी प्रथा से अब विकास योजनाओं के कार्यों में काफी तेजी आयी है.
हर सप्ताह होती है कार्रवाई : डीडीसी की अध्यक्षता में प्रत्येक शनिवार को जिला परिषद के सभागार में होने वाली इस बैठक में योजनाओं से संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई भी होती है. योजनाओं के क्रियान्वयन में रुचि नहीं लेने, समय पर योजनाओं की मापी पुस्तिका बेवजह बुक नहीं करने, योजनाओं की ससमय जीओ टैगिंग नहीं करने, योजनाओं की राशि समय पर लाभुक को नहीं भेजने से समय पर योजनाएं पूर्ण नहीं होने और लंबित योजनाओं के कारणों की लगातार अब जिला में समीक्षा हो रही है. बैठक में प्रखंडवार समीक्षा के दौरान बीपीओ, जेइ और लेखापाल से योजनावार समीक्षा की जाती है.
समीक्षा में संबंधित कर्मियों की लापरवाही या उदासीनता को देखकर प्रत्येक सप्ताह बीपीओ व जेइ जैसे तीन दर्जन से अधिक कर्मी-अधिकारी से आर्थिक दंड वसूले गये हैं. कई जेइ के खिलाफ प्रपत्र क गठन करने या संतोषजनक जवाब नहीं देने पर बर्खास्त करने के निर्देश भी जारी किये जा चुके हैं. अब ऐसे कर्मियों व अधिकारियों में दहशत भी व्याप्त है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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