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By Prabhat Khabar Digital Desk | November 6, 2015 10:01 PM

ओके :: पढ़ने व खेलने की उम्र माथे पर टोकरी लिये घुम रहा बचपन 14 किमी चलकर शहर में बेच रहा दीया तसवीर-31 में दिनेश तथा विकास गलियों में दिया बेचता संवाददाता, गोड्डा किसकी होली और किसकी दिवाली … की बात शहर में चरितार्थ होते देखा जा रहा है. यहां 12 व 14 साल का दो बच्चा माथे पर टोकरी लिये गलियों में आवाज लगा रहा है… दीया ले लो, भुटकी ले लो. दोनाें बच्चा 14 वर्षीय दिनेश पंडित व 12 वर्षीय विकास पंडित पथरगामा से चलकर 14 किमी दूर गोड्डा दीया बेचने आया था.दोनों के पास तन को ढंकने के लिये कपड़ा नहीं था. एक के पैर में चप्पल और दूसरे के खाली पैर उसके बचपन को चिढ़ा रहा है. इन बच्चों ने बताया कि उसके घर में मां पिता जी के अलावा पांच सदस्य है. मां पिता दिन भर चाक चलाकर कुप्पी तथा दीया बनाते हैं और दाेनों दीया को बाजार में बेचने का काम करते है. इससे 100-150 रुपये मिल जाता है. इसी पैसे से इनके परिवार का गुजर बसर चलता है. दोनों बच्चों ने बताया कि वे स्कूल नहीं जाते हैं. घर को चलाने के चक्कर में स्कूल व पढ़ाई छूट रही है. खेलने का समय नहीं मिलता है. दिन भर दीया बेचने के चक्कर में थक का चूर हो जाते है. इस वजह से उनके पास कुछ सोचने का समय नहीं मिलता है.