गुमला : आदिम जनजाति गांवों का हाल, एक साल से बिजली नहीं एजेंट वसूल रहे हैं पैसा

गुमला : जिले के बिशुनपुर, घाघरा, डुमरी व चैनपुर प्रखंड के आदिम जनजाति बहुल गांवों के लोग एक साल से अंधेरे में रहने को विवश है.बिल देने के बाद भी इन गांवों में बिजली आपूर्ति बंद कर दी गयी है. बिजली आपूर्ति क्यों नहीं की जा रही है, इसका जवाब देने को कोई तैयार नहीं. […]

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गुमला : जिले के बिशुनपुर, घाघरा, डुमरी व चैनपुर प्रखंड के आदिम जनजाति बहुल गांवों के लोग एक साल से अंधेरे में रहने को विवश है.बिल देने के बाद भी इन गांवों में बिजली आपूर्ति बंद कर दी गयी है. बिजली आपूर्ति क्यों नहीं की जा रही है, इसका जवाब देने को कोई तैयार नहीं. वहीं, दूसरी ओर फर्जी एजेंट बिजली आपूर्ति कराने के नाम पर एक-एक घर से तीन से चार हजार रुपये की वसूली कर चुका है.

कई बार तार बदलने और ट्रांसफार्मर ठीक कराने के नाम पर पैसे वसूले गये. मंगलवार को आदिम जनजाति युवा संघ जागृति अभियान (पोलपोल पाट, विशुनपुर) के सदस्यों ने उपायुक्त से मुलाकात कर अपनी समस्याओं से संबंधित ज्ञापन सौंपा. लोगों ने कहा कि बिल जमा करने के बाद भी एक साल से बिजली आपूर्ति नहीं की जा रही है.

उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से इन गांवों के लिए बिजली मिस्त्री बहाल की जाये. वहीं बिजली बिल लेने के लिए विभागीय स्तर पर एजेंट की नियुक्ति हो. साथ ही स्थान भी निर्धारित किया जाये, जहां लोग जाकर बिल जमा कर सकें.

डीसी ने मामले की जांच कराते हुए बिजली दिलाने का आश्वासन दिया है. अध्यक्ष विमल असुर ने कहा कि अगर बिजली नहीं मिली तो पहाड़ में बसे लोग सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे. वहीं, बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता से बिजली आपूर्ति के संबंध में जानकारी लेने के लिए जब फोन किया गया तो उनका मोबाइल स्वीच ऑफ बता रहा था.

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