।। दुर्जय पासवान ।।
धारा 364/34 के तहत 10 वर्ष का सजा व 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है. जुर्माना की राशि नहीं देने पर एक वर्ष अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ सकती है. धारा 428 के तहत आठ साल व 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है. जुर्माना की राशि नहीं देने पर नौ माह का अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ सकती है. सभी सजाएं साथ-साथ चलेगी. इस मामले में सरकारी पक्ष की ओर से पीपी मीनी लकड़ा ने पैरवी की थी.
* भाई को मुक्त कराने में बहन की गयी थी जान
गुमला जिला के घाघरा थाना स्थित रूकी घाटी में नौ अगस्त 2014 को शिक्षक प्रकाश टोप्पो व उसकी शिक्षिका बहन सरोज टोप्पो की अपहरण के बाद निर्मम हत्या कर दी गयी थी. प्रकाश का अपहरण छह अगस्त को उस समय हुआ था. जब वह बंसरी स्कूल से अपने घर गुमला शहर के डुमरटोली लौट रहे थे. अपराधियों ने प्रकाश को छोड़ने के लिए पांच लाख रुपये की मांग की थी. उसी रात दो बजे प्रकाश की बहन सरोज टोप्पो फिरौती की रकम लेकर अपराधियों को देने गयी थी. लेकिन अपराधियों ने उसे भी बंधक बना लिया था और फिर दोनों की हत्या कर दी थी.
* फांसी की सजा मिलनी चाहिए थी : सुचिता
हत्या के आरोपी बिरसई उरांव व बलराम उरांव को सजा मिलने के बाद मृतक प्रकाश टोप्पो की पत्नी सुचिता टोप्पो ने कहा कि लंबे समय से इस दिन का इंतजार था. आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा होने पर खुशी हुई है. परंतु, इन लोगों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए थी. जो जैसा किया है. उसे उसकी तकलीफ झेलनी पड़ती है.
आरोपियों द्वारा बेगुनाह लोगों को मारा गया था. फिरौती का रकम लेने के बाद भी हत्या कर दी गयी थी. अभी तक मुआवजा नहीं मिल पाया है. हत्यारों द्वारा फिरौती कि जो रकम लिया गया था. वह भी नहीं मिला. वर्तमान में सुचिता टोप्पो को गुमला डीसी कार्यालय में अनुकंपा में नौकरी लगी है. इसके अलावा मृतका सरोज टोप्पो के बेटा का स्कूल में कलर्क का नौकरी कर रहा है.