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भूमि अधिग्रहण बिल पर देशव्यापी बहस हो : बाबूलाल
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हजारीबाग : पूर्व मुख्यमंत्री सह झाविमो के केंद्रीय अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि भूमि अधिग्रहण बिल पर देशव्यापी बहस भाजपा सरकार करा ले. श्री मरांडी हजारीबाग परिसदन में शनिवार को प्रभात खबर संवाददाता से लंबी बातचीत की. प्रस्तुत है बातचीत के मुख्यबाबूलाल मरांडी ने कहा कि भूमि अधिग्रहण बिल प्रारूप का विरोध, झारखंड सरकार […]

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हजारीबाग : पूर्व मुख्यमंत्री सह झाविमो के केंद्रीय अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि भूमि अधिग्रहण बिल पर देशव्यापी बहस भाजपा सरकार करा ले. श्री मरांडी हजारीबाग परिसदन में शनिवार को प्रभात खबर संवाददाता से लंबी बातचीत की.
प्रस्तुत है बातचीत के मुख्यबाबूलाल मरांडी ने कहा कि भूमि अधिग्रहण बिल प्रारूप का विरोध, झारखंड सरकार ने संविधान की 10वीं अनुसूची का उल्लंघन कर विधायकों को शामिल कराने का मामला और नियोजन नीति बनाने को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन कर रहा हूं. पांच अप्रैल को चतरा में, छह को लातेहार, सात को पलामू और आठ को गढ़वा में कार्यक्रम होगा.
राज तंत्र की तरह भूमि अधिग्रहण बिल पर निर्णय का विरोध : बाबूलाल ने कहा भूमि अधिग्रहण बिल के विरोध के कई कारण हैं. राज्य तंत्र की तरह किसानों की सहमति नहीं ली जा रही है. उद्योग, कल-कारखानों के लिए जमीन की आवश्यकता का आकलन नहीं हो रहा है. उदाहरण जिस तरह एचइसी, बोकारो और अन्य कल- कारखानों के लिए किसानों की जमीन ली गयी. आज एचइसी उन किसानों के जमीन को बेच रही है या दूसरे कामों में इस्तेमाल होने में लगा रही है. इससे किसान को काफी नुकसान होगा. श्री मरांडी ने कहा कि किसानों व रैयतों से ली गयी जमीन पर फैक्टरी के कर्मचारियों के कल्याण के लिए घर, पार्क, मैदान बनाना उचित है.
लेकिन इसमें कोई व्यावसायिक भवन बना कर पैसा कमाना किसानों को धोखा देनेवाला है. सरकार यह स्पष्ट करे कि जमीन जिस उद्देश्य के लिए लिया जा रहा है, उसी में इसका इस्तेमाल होगा. लाखों लोग जो विस्थापित हो गये हैं. गांव के गांव उजड़ गये हैं.
इन लोगों को बसाने के लिए सरकार की ओर से कोई पहल जमीन पर नहीं दिखती है. रामगढ़ समेत कई कोलियरी का भ्रमण करने पर यह पता नहीं चल पाता है कि यहां रह रहे लोग विस्थापित होकर कहां चले गये. श्री मरांडी ने कहा कि विस्थापन, पुनर्वास के साथ-साथ जमीन मालिकों को उचित दर भी नहीं दिया जा रहा है. जमीन के बदले जमीन देने की बात नहीं हो रही है. उन्होंने कहा कि 1899 इंडियन स्टांप एक्ट को सरकार क्यों नहीं बदल रही. विदेशों से आनेवाले मल्टी नेशनल कंपनियों के लिए किसानों को बेघर करना उचित नहीं है.
दूसरे दल के विधायकों को शामिल करने का विरोध : बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड में संविधान की 10वीं अनुसूची का उल्लंघन हुआ है. कोई निर्दलीय विधायक के भी दूसरे पार्टी में शामिल होने से पहले पार्टी की सदस्यता समाप्त होती है. झाविमो के छह विधायक को भाजपा में शामिल करा कर संविधान का उल्लंघन किया गया. नैतिकता की बात भाजपा करती है. दूसरी ओर दूसरे दल के विधायकों को तोड़ने का काम करती है.
सरकार नियोजन नीति बनाये : झारखंड राज्य का गठन सत्ता में, सरकारी नौकरियों में, भागीदारी के लिए हुई थी. जिस प्रकार आंध्र प्रदेश और मणिपुर में नियोजन नीति बनी हुई है. सरकार इसी तरह यहां पर भी नियोजन नीति बना कर झारखंड के लोगों को सरकारी नौकरियों में बहाल करे. बाबूलाल मरांडी के साथ झाविमो नेता मुन्ना मल्लिक, कृष्ण दास पांडेय समेत पार्टी के कई नेता उपस्थित थे.
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