Jagannath Rath Yatra 2020 : गुमला में रथ पर नहीं चढ़े महाप्रभु जगन्नाथ, बड़कागांव में कुछ श्रद्धालुओं ने पहुंचाया मौसी बाड़ी
Jagannath Rath Yatra 2020 : गुमला के रथयात्रा मेला के इतिहास में 320 साल में यह पहला ऐसा मौका आया है जब रथयात्रा मेला भी नहीं लगी. वहीं, हजारीबाग के बड़कागांव में भी महाप्रभु जगन्नाथ की रथयात्रा नहीं निकाली गयी. पुजारी और कुछ श्रद्धालुओं ने महाप्रभु को मौसी बाड़ी पहुंचाया.
Jagannath Rath Yatra 2020 : गुमला : कोरोना महामारी (Corona pandemic) के कारण भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा इस बार रथ पर नहीं चढ़ें. गुमला के रथयात्रा मेला के इतिहास में 320 साल में यह पहला ऐसा मौका आया है जब रथयात्रा मेला भी नहीं लगी. न ही भगवान जगन्नाथ अपने भाई और बहन के साथ मौसीबाड़ी गये. सिर्फ बिशुनपुर प्रखंड में भगवान को गोद में लेकर मौसीबाड़ी पहुंचाया गया. वहीं, हजारीबाग के बड़कागांव में भी महाप्रभु जगन्नाथ की रथयात्रा नहीं निकाली गयी. पुजारी और कुछ श्रद्धालुओं ने महाप्रभु को मौसी बाड़ी पहुंचाया.
गुमला में महाप्रभु जगन्नाथ की रथयात्रा में पूरी सावधानी बरती गयी. मात्र 5 लोग भगवान के पास पूजा-अर्चना की. इस दौरान रथयात्रा की मनाही पर क्षेत्र में कहीं भी रथयात्रा नहीं निकाली गयी. करौंदी में 25 फीट दूर से गेट के बाहर से श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन किये.
सिसई प्रखंड़ के नागफेनी गांव में 316 वर्ष के इतिहास में पहली बार ऐतिहासिक जगन्नाथ रथयात्रा सह मेला का आयोजन नहीं हुआ. बीडीओ प्रवीण कुमार, सीओ सुमंत तिर्की, प्रशासन की ओर से दंडाधिकारी के रूप में पंचायत सेवक परमानंद बड़ाइक को मंदिर के पास तैनात किया गया था. इस बीच अधिकारियों ने श्रद्धालुओं के बीच मास्क का वितरण भी किया.
बसिया में रथयात्रा नहीं निकलने से मायूस हुए श्रद्धालुबसिया प्रखंड के निनई, रामजड़ी, नरेकेला, लौंगा और बनई में रथयात्रा सह मेला का आयोजन नहीं हुआ. सिर्फ मंदिरों में पूजा- अर्चना की गयी. कामडारा प्रखंड में भी मेला नहीं लगा. मंदिर में सिर्फ पूजा- पाठ की गयी. रथयात्रा नहीं निकलने से क्षेत्र के श्रद्धालु काफी मायूस दिखें.
भरनो में रथयात्रा पर नहीं लगा मेलासमसेरा गांव स्थित चंदागढ़ में रथ यात्रा नहीं निकाली गयी. साथ ही मेला भी नहीं लगाया गया. मंदिर में पुजारी जगन्नाथ उरांव, एतवा उरांव, जुब्बी उरांव सहित 5 लोगों ने ही पूजा- अर्चना की. भरनो के करंज व करौंदाजोर में वर्षों से लगने वाला ऐतिहासिक रथयात्रा इस बार कोरोना महामारी के कारण स्थगित रहा. पुजारी सुरेंद्र पंडित ने बताया कि इस बार पूजा अर्चना कर महाप्रभु का भोग लगाकर रथयात्रा संपन्न किया गया. रथ मेला संचालक कुंजबिहारी सिंह, पुजारी उपेंद्रनाथ गिरी ने संयुक्त रूप से बताया कि इस बार सरकार के गाइड लाइन कोरोना जैसे महामारी को देखते हुए इस बार रथयात्रा को रद्द करना पड़ा.
टोटो में भगवान को पहुंचाया मौसी बाड़ीटोटो में रथयात्रा पर पुजारी और समिति के सदस्यों द्वारा पैदल मार्च कर भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र एवं देवी सुभद्रा की प्रतिमा को मौसीबाड़ी तक पहुंचाया. मंदिर के पुजारी अजय किशोर पाठक ने पूजा- अर्चना की. नंदलाल प्रसाद ने बताया कि यहां 100 वर्षों से भी पहले से रथयात्रा निकाली जाती है, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण रथयात्रा नहीं निकाली गयी है.
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बिशुनपुर में भगवान को गोद में पहुंचाया मौसी बाड़ीबिशुनपुर प्रखंड में रथयात्रा नहीं निकाली गयी. श्रद्धालुओं ने भगवान को गोद में उठाकर जयकारा लगाते हुए मौसी बाड़ी पहुंचाया. मौके पर प्रमुख रामप्रसाद बड़ाइक, थानेदार मोहन कुमार, भिखारी भगत, केदार साहू, एसआई नवीन सिंह, रामदास यादव, प्रदीप भगत, बिल्टू लोहरा, टैमन दास, मुनू पंडित, अरुण गिरी, बसंत कुमार सहित कई श्रद्धालु मौजूद थे.
बड़कागांव में भगवान पहुंचे मौसी बाड़ीहजारीबाग जिला अंतर्गत बड़कागांव प्रखंड क्षेत्र में महाप्रभु जगन्नाथ, भाई बलभद्र और देवी सुभद्रा को मौसी बाड़ी पहुंचाया गया. राम जानकी मंदिर के पुजारी चिंतामणि महतो ने बताया कि अंचला अधिकारी वैभव कुमार सिंह एवं बड़कागांव पुलिस द्वारा कुछ लोगों के सहारे महाप्रभु को मौसी बाड़ी पहुंचाने का निर्देश दिया था. इसके तहत मात्र 5 लोगों ने महाप्रभु के रथ को खींच कर उन्हें मौसी बाड़ी पहुंचाया.
Posted By : Samir ranjan.