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समुद्री मार्ग से हाजियों को भेजने के प्रस्ताव का विरोध

जमशेदपुर. नयी हज पॉलिसी में जहां सब्सिडी खत्म करने का प्रपाेजल दिया गया है, वहीं झारखंड की राजधानी रांची से उड़ान भी रद्द करने का फरमान जारी कर दिया गया है. झारखंड के हाजी अब रांची से उड़ान नहीं भर कर पूर्व की तरह काेलकाता से उड़ान भरेंगे. साथ ही 2018 में हाजियों को समुद्री […]

जमशेदपुर. नयी हज पॉलिसी में जहां सब्सिडी खत्म करने का प्रपाेजल दिया गया है, वहीं झारखंड की राजधानी रांची से उड़ान भी रद्द करने का फरमान जारी कर दिया गया है. झारखंड के हाजी अब रांची से उड़ान नहीं भर कर पूर्व की तरह काेलकाता से उड़ान भरेंगे. साथ ही 2018 में हाजियों को समुद्री रास्ते से भेजने का प्रस्ताव है, जिसका शहर के मुसलिम समुदाय विरोध कर रहा है. हज यात्रियों की रवानगी के स्थान 21 से घटाकर 9 करने की याेजना बनायी गयी है.

हज यात्री अब दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता, अहमदाबाद, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु और कोचिन में उड़ान भरेंगे. हज यात्रियाें की सुविधाअाें काे ध्यान में रखते हुए रांची में कराेड़ाें रुपये की लागत से नये हज हाउस का निर्माण कराया जा रहा है. पुराने हज हाउस का निर्माण पूरा नहीं हुआ था. वह खंडर की स्थिति में चला गया था. मुख्यमंत्री के निर्देश पर हज हाउस का घटिया निर्माण करने वालाें के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज करायी जा रही है. नयी हज पॉलिसी में सब्सिडी खत्म करने का प्रपोजल केंद्रीय मंत्री नकवी को साैंपा गया है, जिसमें खर्च घटाने के लिए हज यात्रियाें काे हवाई जहाज के बजाय समुद्री रास्ते से भेजने का सुझाव है. सुप्रीम काेर्ट ने 2022 तक सब्सिडी समाप्त करने काे कहा था. नयी नीति लागू करने से पहले सभी पक्षाें से बैठकर बात की जायेगी.

मेहरम का काेटा 500 कर दिया गया
ड्रॉफ्ट की सिफारिशाें के मुताबिक 45 वर्ष से कम आयु की महिलाएं मेहरम के साथ ही जायेंगी. मेहरम का कोटा 200 से बढ़ाकर 500 किया जायेगा. 45 साल से अधिक की महिलाएं 4 या अधिक के ग्रुप में बिना मेहरम हज पर जा सकेंगी. मेहरम यानी ऐसा पुरुष जिससे महिला कभी शादी न कर सके, जैसे पिता, भाई और बेटा. सब्सिडी बंद करने से होने वाली बचत का पैसा मुस्लिमों की बेहतरी पर खर्च किया जायेगा.
सब्सिडी समाप्त करने से लाेगाें काे परेशानियां हाेंगी. नीति की खामियाें का उल्लेख कर सुधार की मांग करेंगे. रांची से उड़ान शुरू हाेने से झारखंडी हाजियाें काे सहूलियत हाे गयी थी. अब उन्हें परेशान हाेना हाेगा.
काजी इसहाक अंजूम, इमाम कीताडीह मसजिद
झारखंड के लाेग उतने एडवांस नहीं हैं, उन्हें काफी परेशानियाें का सामना करना पड़ेगा. पहले भी काेलकाता से उड़ान हाेती थी, ताे तीन दिन पहले घर से निकलना पड़ता था. रांची से उड़ान होने से काफी समय बचता था.
हाजी शकील अहमद, हज कमेटी साकची
दुनिया चांद-ताराें की बात कर रही है और सरकार समुद्री सफर की आेर ले जाना चाहती है. समुद्री सफर में समय लगेगा व परेशानियां हाेंगी. उम्र दराज लाेग चाराें आेर पानी ही पानी देखेंगे ताे उन्हें मानसिक रूप से पीड़ा हाेगी.
काजी मुश्ताक, जुगसलाई मसजिद
35 साल पहले जाते थे पानी जहाज में
पानी जहाज में उनके पिता-चाचा हज पर जा चुके हैं. पानी जहाज में जाने वालाें की तबीयत बिगड़ जाती थी. पानी जहाज पर अक्सर खतरा रहता था. सरकार यात्रा असान करने की जगह परेशानियां बढ़ा रही.
हाजी महमूद आलम, सदस्य झारखंड हज कमेटी

Prabhat Khabar Digital Desk
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