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अब सभी पेट्राेल पंपाें के टॉयलेट का हाेगा सार्वजनिक उपयाेग, लगाना हाेगा बैनर

जमशेदपुर: शहर के सभी 32 पेट्राेल पंप के शाैचालयाें काे पब्लिक टॉयलेट घाेषित करने का निर्देश अक्षेस द्वारा दिया गया है. पेट्राेल पंपाें पर बने टॉयलेट का इस्तेमाल सार्वजनिक रूप से पब्लिक करे, इसके लिए वहां बैनर-साइन बाेर्ड लगाने काे कहा गया है. पुरुष-महिला के लिए अलग-अलग टॉयलेट बनाने काे कहा गया है. जहां शाैचालय […]

जमशेदपुर: शहर के सभी 32 पेट्राेल पंप के शाैचालयाें काे पब्लिक टॉयलेट घाेषित करने का निर्देश अक्षेस द्वारा दिया गया है. पेट्राेल पंपाें पर बने टॉयलेट का इस्तेमाल सार्वजनिक रूप से पब्लिक करे, इसके लिए वहां बैनर-साइन बाेर्ड लगाने काे कहा गया है.
पुरुष-महिला के लिए अलग-अलग टॉयलेट बनाने काे कहा गया है. जहां शाैचालय नहीं है, वहां जल्द इसका निर्माण करने काे कहा गया है. पेट्राेल पंप संचालक काे यह जानकारी लिखित देनी हाेगी कि उन्हाेंने पब्लिक टॉयलेट घाेषित कर दिया है. चार जनवरी से स्वच्छ सर्वेक्षण प्रतियाेगिता-2018 शुरू हाेने जा रही है. इस सर्वे में पब्लिक टॉयलेट काे लेकर भी अंक दिये जाते हैं. अक्षेस के विशेष पदाधिकारी संजय कुमार पांडेय द्वारा शहर के पेट्राेल पंपाें के टॉयलेट का निरीक्षण किया गया, जहां उन्हें कुछ खामियां मिली, जिन्हें दूर करने काे कहा गया है.
पेट्राेल पंप पर हाेने चाहिए तीन टॉयलेट. पेट्राेलियम कंपनियाें के निमानुसार पेट्राेल पंपाें पर तीन टॉयलेट बनाये जाने चाहिए. इनमें एक पुरुष-महिला व एक विकलांग के लिए हाेना जरूरी है. इसके लिए साइन बाेर्ड आैर कैटागिरी का जिक्र हाेना चाहिए. जगह के अभाव में यदि तीन नहीं बन पाते हैं, ताे पुरुष-महिला का अलग-अलग अवश्य हाेना चाहिए. पेट्राेल पंपाें पर टॉयलेट-वॉशरूम का इस्तेमाल करने के लिए यदि काेई महिला आती हैं, ताे उनके साथ पंप पर माैजूद महिला कर्मचारी का हाेना अनिवार्य है. महिला कर्मचारी यदि नहीं हैं, ताे वहां के प्रबंधक काे उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी तय करनी है.
टॉयलेट से हाे रही है चाेरी. साकची एचपी पंप के कन्हैया ने बताया कि टॉयलेट से कई बार जेट सिस्टम की चाेरी कर ली गयी. इसकी जानकारी काफी देर बाद मिलती है, जब काेई दूसरा व्यक्ति उसे इस्तेमाल कर जानकारी देता है. ऐसी ही घटना साकची सरकार बिल्डिंग समेत अन्य पंपाें पर भी हाे रही है.
तिवारी पंप में लगी रहती है भीड़. बिष्टुपुर स्थित बीपी के तिवारी पेट्राेल के प्रबंधक त्रिवेणी ने बताया कि उनके यहां सुबह से लेकर देर रात तक टॉयलेट का इस्तेमाल करनेवालाें की भीड़ लगी रहती है. इसमें पंप के ग्राहक कम, जबकि आस-पास की दुकानाें के स्टॉफ अधिक हाेते हैं. आस-पास बड़ी-बड़ी दुकानें लाेगाें ने खाेल रखी हैं, लेकिन किसी ने भी अपने कर्मचारियाें के लिए टॉयलेट की व्यवस्था नहीं की है. कंपनी काे चार यूरिनल पॉट लगाने को पत्र लिखा गया है.
साेनी पंप पर नहीं है टॉयलेट. शहर के 32 पेट्राेल पंपाें में सिर्फ बिष्टुपुर का साेनी पंप ही ऐसा है, जहां टॉयलेट की व्यवस्था नहीं है. इसके अलावा साकची, आम बगान के पेट्राेल पंपाें पर एक ही टॉयलेट है, जबकि अन्य 29 में दाे टॉयलेट की व्यवस्था है. साेनी पंप में जगह नहीं हाेने के कारण पुरुष-महिला टॉयलेट का निर्माण नहीं किया गया. रानीकूदर पंप में यूरिनल है, लेकिन टॉयलेट एक ही है, जिसका इस्तेमाल अॉफिस के लाेग ही करते हैं.
पंपकर्मियाें के टॉयलेट सभी के लिए
पेट्राेल पंपाें पर पूर्व से ही टॉयलेट बने हुए हैं. उनका इस्तेमाल पंपकर्मी करते हैं. उन्हीं काे उपयाेग जरुरत पड़ने पर पेट्राेल-डीजल भराने के लिए आनेवाले ग्राहक भी करते हैं. जनरल-पुरुष टॉयलेट का प्रवेश द्वार जहां कैंपस बिल्डिंग के बाहर से है, वहीं महिला टॉयलेट काे कार्यालय परिसर के अंदर बनाया है. साकची गाेलचक्कर सरकार बिल्डिंग के पास स्थित बीपी पेट्राेल पंप पर सिर्फ एक ही टॉयलेट है, जिसका इस्तेमाल सार्वजनिक रूप से काेई भी कर सकता है. वहीं साकची गाेलचक्कर बाजार मास्टर अॉफिस के पास एचपी के पंप में बाहर की आेर ही पुरुष आैर महिला टॉयलेट बनाये हुए हैं. सर्किट हाउस स्थित आइआेसी के पंप में पुरुष अौर महिला का अलग-अलग टॉयलेट बना हुअा है.
पेट्राेल पंपाें का टॉयलेट का इस्तेमाल किस तरह आम लाेग करें, इसके लिए पंप संचालकाें काे अपनी जिम्मेदारी निभानी हाेगी. सार्वजनिक शाैचालय का बाेर्ड लगे. स्वच्छता काे ध्यान में रखते हुए इसे सभी इस्तेमाल करें. पिछले दिनाें उन्हाेंने पंपाें का निरीक्षण कर उन्हें इस अभियान में शामिल हाेने काे कहा था.
संजय पांडेय, विशेष पदाधिकारी
जमशेदपुर अक्षेस
ग्राहकाें की सुविधा के लिए पंपाें पर टॉयलेट उपलब्ध हैं, जिनका जानकार लाेग बाखूबी इस्तेमाल कर रहे हैं. टॉयलेट पंप की संपत्ति है, इसका उपयाेग लाेगाें काे करना चाहिए, कुछ लाेग उन्हें डैमेज कर नुकसान पहुंचाने का भी काम करते हैं. 2-3 पंपाें पर टॉयलेट की कमी है, जिसे जल्द दूर कर लिया जायेगा. जगह की किल्लत हाेने के कारण दाे टॉयलेट का निर्माण किया जा रहा है, अन्यथा पंपाें पर तीन बनाये जाने का निर्देश है.
राजीव कुमार सिंह, महासचिव
पेट्राेल-डीलर एसाेसिएशन, जमशेदपुर
Prabhat Khabar Digital Desk
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