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तीन साल की बच्ची का हुआ कोकलियर इंप्लांट, देशभर में देखा गया

टीएमएच में इएनटी का तीन दिनी सम्मेलन शुरू जमशेदपुर : टीएमएच के प्रेक्षागृह में एसोसिएशन ऑफ ओटोलेरिंगगोलॉजिस्ट हेड एंड नेक सर्जन ऑफ इंडिया के बिहार एवं झारखंड शाखा की ओर से तीन दिवसीय कार्यशाला सह सम्मेलन की शुक्रवार को शुरुआत हुई. इसके पहले दिन देश भर से आये डॉक्टरों ने सात ऑपरेशन किये, जिसकाे एप […]

टीएमएच में इएनटी का तीन दिनी सम्मेलन शुरू
जमशेदपुर : टीएमएच के प्रेक्षागृह में एसोसिएशन ऑफ ओटोलेरिंगगोलॉजिस्ट हेड एंड नेक सर्जन ऑफ इंडिया के बिहार एवं झारखंड शाखा की ओर से तीन दिवसीय कार्यशाला सह सम्मेलन की शुक्रवार को शुरुआत हुई.
इसके पहले दिन देश भर से आये डॉक्टरों ने सात ऑपरेशन किये, जिसकाे एप के माध्यम से पूरे देश में लोगों ने देखा. साथ ही लोगों ने इस संबंध में जानकारी भी ली, जिसका ऑपरेशन कर रहे डॉक्टरों ने जवाब भी दिया. टीएमएच में इस तरह का पहला ऑपरेशन किया गया.
वहीं शुक्रवार को बोकारो के सिराज अहमद की तीन वर्षीय बेटी हुमेरा साइवा का भोपाल से आये डॉ सत्यप्रकाश दुबे, डाॅ संतोष (जयपुर), डॉ दीपक के साथ ही टीएमएच के डॉ केपी दूबे सहित अन्य डॉक्टरों ने नयी तकनीक से कोकलियर इंप्लांट किया. अब वह बच्ची अन्य बच्चों की तरह बोल सकेंगी. वहीं दिव्या ईएनटी अस्पताल भोपाल के डॉ सत्य प्रकाश दुबे ने कहा कि देश के 11 राज्यों में भारत सरकार की एडीआइपी योजना के तहत इस तरह के मूक-बधिर बच्चों का नि:शुल्क कोकलियर इंप्लांट किया जाता है. उन्होंने कहा कि झारखंड के टीएमएच में पहली बार इस तरह का ऑपरेशन किया जा रहा है.
वह साढ़े तीन सालों के अंदर लगभग पांच सौ से ज्यादा बच्चों का ऑपरेशन कर चुके हैं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है. साथ ही वे बीएचयू, कोलकाता मेडिकल कॉलेज सहित 17 मेडिकल सेंटर में इसका प्रशिक्षण भी दे चुके हैं. उन्होंने कहा कि एक हजार में एक बच्चा इस तरह जन्म लेता है. उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार अपने राज्य में इस तरह का प्रोग्राम को लागू करे, ताकि यहां के बच्चों इसका लाभ मिल सके. इस कार्यशाला में शहर के साथ ही देश के अन्य जगहों से लगभग 250 डॉक्टर भाग ले रहे हैं.
एक साल बाद बच्चा पूरी तरह बोलने लगता है
डॉ सत्यप्रकाश दूबे ने कहा कि इस तरह के बच्चों का भी इलाज होता है, इसकी जानकारी काफी कम लोगों को होती है. इसके कारण लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पाता है. इसको लेकर सरकार को लोगों के बीच जागरूकता फैलाने की जरूरत है.
साथ ही सरकार की आेर से इसके लिए चलायी जा रही योजना के बारे में जानकारी देनी होगी. उन्होंने कहा कि इस तरह के बच्चों को जितना जल्दी कोकलियर इंप्लांट करा दिया जाता है, उतना लाभदायक होता है. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के 21 दिनों के बाद बच्चा थोड़ा-थोड़ा बोलने लग जाता है. वहीं ऑपरेशन के बाद इसका एक साल तक थेरेपी कराने की जरूरत होती है. उसके बाद बच्चा पूरी तरह से बोलने लग जाता है.
क्या है कोकलियर इंप्लांट
कोकलियर इंप्लांट एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है. जो सुनने को सुविधाजनक बनाने के लिए शल्य चिकित्सा द्वारा कोकलिया के अंदर प्रत्यारोपित किया जाता है. कोकलियर इंप्लांट उन बच्चों के लिए लाभदायक है, जिन्हें अत्यधिक श्रवण की हानि तथा तेजी से श्रवण की हानि हो रही है. एक से पांच साल के बच्चाें को जिसे जन्मजात या जन्म के समय श्रवण हानि या बहुभाषी उपरांत श्रवण बाधिता है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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