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लापरवाही l सोनुवा की महिला को हुए बड़े सिर वाले जुड़वां बच्चे, बिना मां के ही भेज दिया गया रिम्स जमशेदपुर : एमजीएम अस्पताल में पैदा हुए जुड़वां बच्चों के साथ चिकिस्कीय लापरवाही का एक गंभीर मामला तब सामने आया जब बागबेड़ा स्थित चाईबासा बस स्टैंड के पास सोमवार रात 12.30 बजे नवजातों को झोले […]

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लापरवाही l सोनुवा की महिला को हुए बड़े सिर वाले जुड़वां बच्चे, बिना मां के ही भेज दिया गया रिम्स

जमशेदपुर : एमजीएम अस्पताल में पैदा हुए जुड़वां बच्चों के साथ चिकिस्कीय लापरवाही का एक गंभीर मामला तब सामने आया जब बागबेड़ा स्थित चाईबासा बस स्टैंड के पास सोमवार रात 12.30 बजे नवजातों को झोले में रखकर नाश्ता कर रहे उनके पिता व मामा को पुलिस ने बच्चा चोर समझ पकड़ लिया. छानबीन में यह बात सामने आयी कि सोनुवा (प. सिंहभूम) के माहीपीन गांव निवासी डागो बोदरा की पत्नी सुरडी बोदरा ने दो फरवरी को जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था. दोनों बच्चों का सिर बड़ा होने के कारण
उन्हें इलाज के लिए रिम्स बिना मां के ही भेज दिया गया. वहां उनका इलाज नहीं हो सका. उसके बाद वापस आने के लिए एंबुलेंस भी नहीं दिया गया. नवजात बच्चों को रांची से लेकर सोमवार देर रात उसके पिता डागो बोदरा और मामा सिलाय सोय जमशेदपुर पहुंचे. वे बागबेड़ा स्थित चाईबासा बस स्टैंड के पास बच्चों को झोला में रखकर नाश्ता कर रहे थे, तभी पुलिस ने बच्चा चोर के संदेह में उन्हें पकड़ लिया. पूछताछ के बाद सच्चाई जानने के बाद उसे छोड़ा गया तथा नवजात को एमजीएम में भर्ती उसकी मां सुरडी बोदला के हवाले कर दिया.
जानकारी के अनुसार, बच्चों का सिर बड़ा होने के कारण ऑपरेशन से प्रसव कराया गया था.
पांच फरवरी को चिकित्सकों ने जुड़वा बच्चों के बड़े सिर का इलाज कराने के लिए एंबुलेंस से रांची रिम्स भेजवाया. दिन के एक बजे के लगभग डागो बोदरा अपने साला सिलाय सोय के साथ एंबुलेंस से रांची गये थे. अस्पताल पहुंचाकर एंबुलेंस लौट आयी. वहां रिम्स में बच्चाें का इलाज नहीं होने पर डागो बोदरा रात आठ बजे बस पकड़कर अपने साला और बच्चे को लेकर जमशेदपुर लौट आये. बस रात में टाटानगर रेलवे स्टेशन के पास पहुंची. भूख लगे होने के कारण डागो बोदरा ने बच्चों को झोला में रख दिया और नाश्ता करने लगे. तभी वहां पुलिस पहुंच गयी और दोनों को पकड़कर पूछताछ करने लगी. जांच के बाद उन्हें बच्चों के साथ एमजीएम अस्पताल पहुंचाया.
नवजात को लेकर यात्रा करना खतरनाक
एमजीएम के डॉक्टरों के अनुसार चार या पांच दिन के नवजात को लेकर इस तरह यात्रा करना खतरनाक है. इस दौरान कुछ भी हो सकता है. परिजन अगर रांची गये थे तो उन लोगों को दो सप्ताह तक वहीं रहकर इलाज कराने के बाद ही आना चाहिए था.
कोट…
नवजात के बारे में किसी ने 100 पर डायल कर सीसीआर वैन को सूचना दी थी. जानकारी मिलने के बाद बागबेड़ा पुलिस पहुंची. नवजात बच्चों को उसका पिता रांची से इलाज कराकर शहर लौटा था. मामले की जांच के बाद नवजात को एमजीएम अस्पताल में इलाजरत उसकी मां के पास पहुंचा दिया गया.
– रामयश प्रसाद, थाना प्रभारी, बागबेड़ा.

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