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शंकराचार्य सैलून से गये हावड़ा जमशेदपुर : द्वारिका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती सोमवार की रात टाटानगर स्टेशन से हापा-हावड़ा एक्सप्रेस से हावड़ा रवाना हुए. शंकराचार्य विशेष सैलून से रात 12: 25 बजे हापा-हावड़ा एक्सप्रेस से गये. सोमवार की रात 12.20 बजे ट्रेन टाटानगर स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर चार पर पहुंची थी. इससे […]

शंकराचार्य सैलून से गये हावड़ा
जमशेदपुर : द्वारिका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती सोमवार की रात टाटानगर स्टेशन से हापा-हावड़ा एक्सप्रेस से हावड़ा रवाना हुए. शंकराचार्य विशेष सैलून से रात 12: 25 बजे हापा-हावड़ा एक्सप्रेस से गये. सोमवार की रात 12.20 बजे ट्रेन टाटानगर स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर चार पर पहुंची थी. इससे पूर्व स्टेशन के सैलून ड्रांपिंग यार्ड में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती कार से पहुंचे. कार से वे सीधे सैलून में सवार हो गये. स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को छोड़ने कई श्रद्धालु प्लेटफॉर्म पहुंचे थे. उनके आगमन को देखते हुए आरपीएफ और जीआरपी जवान तैनात थे.
दोपहर में आया था विशेष कोच. स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के आगमन को देखते हुए सोमवार को रेलवे की ओर से विशेष कोच चक्रधरपुर से इस्पात एक्सप्रेस में लगा टाटानगर भेजा गया था. पहले उनका संबलेश्वरी एक्सप्रेस से हावड़ा जाना था. ट्रेन के तीन घंटे से ज्यादा विलंब होने से अंतिम समय में उनके कार्यक्रम में फेर बदल हुआ.
जमशेदपुर : घाघीडीह सेंट्रल जेल की सुरक्षा एक बार सवालों के घेरे में है. अखिलेश सिंह और परमजीत गिरोह के बंदियों को राज्य के दूसरे जेलों में स्थानांतरित होने से कुछ समय के लिए जेल में वर्चस्व की लड़ाई को टालने में सफलता मिली थी. लेकिन राज्य के दूसरे जेलों से घाघीडीह जेल शिफ्ट किये गये बंदियों के बीच गिरोह संचालन को लेकर टकराव की आशंका खुफिया विभाग द्वारा जताने से प्रशासनिक महकमा सकते में है. वर्तमान में जेल में अलकायदा का संदिग्ध आतंकी मसूद अहमद उर्फ मोनू और मो. नसीम उर्फ राजू बंद है.
इसके अलावा पलामू के सुजीत सिन्हा, विकास दुबे, वासेपुर का डॉन फहीम खान सहित 17 नामी गैंगस्टर भी जेल में है. पूर्व में सुजीत सिन्हा को घाघीडीह जेल से इसी कारणों से हटाया गया था. जेल में न तो मोबाइल फोन के लिए जैमर ठीक से काम करता है और न ही एंड्रॉयड फोन के इस्तेमाल को रोकने का कोई उपाय है. शहर में कई घटनाओं के बाद अपराधियों के बीच व्हाट्सएप और फेसबुक पर चैटिंग से होने वाली बात भी सामने आ चुकी है.
जेल में नहीं हाइ सिक्यूरिटी सेल और जेलर. घाघीडीह जेल में हाइ सिक्यूरिटी सेल नहीं है. राज्य के दो जेलों (हजारीबाग व रांची )में हाइ सिक्यूरिटी सेल हैं.
भले ही घाघीडीह जेल को सेंट्रल दर्जा का दर्जा प्राप्त है, लेकिन सेंट्रल जेल की तर्ज पर यहां पर्याप्त संसाधन नहीं हैं. फरवरी माह में जेलर के सेवानिवृत्त होने के बाद जेल में जेलर का पद भी रिक्त हो गया है. सहायक जेलर के तीन पद है,लेकिन एक ही सहायक जेलर कार्यरत हैं. तीन घेरे में जेल की सुरक्षा. घाघीडीह जेल की सुरक्षा तीन घेरे में है. बाहरी सुरक्षा का जिम्मा जिला पुलिस के पास है.
जहां से मुलाकाती प्रवेश करते हैं. वाच टावर और सामानों की मेटल डिटेक्टर से जांच होती है. उसके बाद दूसरा सुरक्षा घेरा है. जिससे होकर अंदर प्रवेश किया जाता है और यह कार्यालय की तरफ जाता है. यहां सुरक्षा की कमान जैप जवानों पर है. उसके बाद जेल का प्रवेश गेट है. जेल के अंदर तैनात सुरक्षाकर्मियों में 80 प्रतिशत पूर्व सैनिक हैं. जेल के कुल आठ वाच टावरों पर पूर्व सैनिकों की तैनाती होती है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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