जमशेदपुर : यूसिल के ईंचड़ा में नयी खदान में उत्खनन की अनुमति देने से खनन विभाग ने इनकार कर दिया है. खनन विभाग ने उत्खनन के लिए यूसिल के आवेदन को रोकते हुए निर्देश दिया है कि पहले नियमानुसार सभी संचालित खदानों पर पांच फीसदी राशि का भुगतान करें. यूसिल को पूर्व से लेकर आज तक संचालित खदानों के लिए जमीन के वास्तविक रजिस्ट्री दर यानी न्यूनतम दर का पांच फीसदी सरकार को जमा कराना होगा.
इसके बाद ही पुराने खदान का नवीकरण अथवा नये खदान को मंजूरी दी जा सकती है. बताया जाता है कि नरवा पहाड़ के गुर्रा नदी के पास प्रमुख नगर गांव, ईंचड़ा, सीताडांगा गांव के समीप यूरेनियम का बड़ा भंडार मिला है. यहां लगभग 305 मीटर तक ड्रिल कर यूरेनियम के भंडार का पता लगाया गया है. यहां सीमित एरिया में बेहतर क्वालिटी का यूरेनियम पाने की बात कही जा रही है. नयी माइंस के लिए सर्वे चल रहा है. सिद्धेश्वर पहाड़ के पास दो स्थानों पर यूरेनियम का भंडार मिलने की जानकारी है.
यूसिल को डेड रेंट व रॉयल्टी घटाने से केंद्र कर चुकी है इनकार
नये प्रावधान के अनुसार यूसिल को जमीन की न्यूनतम दर की पांच फीसदी राशि अब तक के खनन पर देनी होगी. जादूगोड़ा में यूसिल की ओर से 1967 से उत्खनन कार्य चल रहा है. बताया जाता है कि जमीन रेंट के हिसाब से पांच फीसदी का भुगतान करने से यूसिल का राजस्व घाटा व लागत खर्च बढ़ना तय है. यूसिल जादूगोड़ा, भाटिन, तुरामडीह, बागजाता, नरवा पहाड़, माहुलडीह, बंदुहुड़ांग आदि में खनन कर रही है. डीएइ ने कहा है कि परमाणु खनिज नीतिगत खनिज के अंतर्गत आता है और इसकी भारत में बेहद कमी है. साथ ही हमारे ऊपर अपने लाभ के हिस्से को डीएमएफ (डिस्ट्रिक्ट मिनरल्स फाउंडेशन) और एनएमइटी (नेशनल मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट) से बांटने का भी भार है. गौरतलब है कि झारखंड और तमिलनाडु (जहां वर्तमान में यूरेनियम का उत्खनन और प्रसंस्करण चल रहा है) ने खनन मंत्रालय से राजस्व दर और डेड रेंट में बढ़ोतरी करने को कहा है.
