डॉ अरविंद चरन मंगल, जनरल फीजिशियन जब हार्ट के अट्रिया से इलेक्ट्रक सिग्नल आसानी से पास नहीं होते तो उस बीमारी को कंपलीट हॉर्ट ब्लॉक कहा जाता है. साधारण शब्दों में कहा जाये तो हार्ट के ऊपरी चेंबर में इलेक्ट्रक सिग्नल न पहुंचने के कारण ही यह बीमारी होती है. ऐसे में मरीज के हार्ट रेट और रिदम को बनाये रखने के लिए आर्टीफिशियल पेसमेकर लगाया जाता है. इस बीमारी के कारण मरीज का हॉर्ट बीट औसत से ज्यादा या फिर कम हो जाता है. यदि, हार्ट बीट काफी हो जाता है तो वह शरीर से पर्याप्त मात्रा में खून रिसीव नहीं कर पाता है. इस बीमारी के कारण मरीज को अचानक चक्कर आने लगता है. छाती पर भारीपन का एहसास होता है. आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है और उल्टी जैसा लगता है. ऐसा होने पर डॉक्टरों की सलाह लें. ज्यादार यह बीमारी उन लोगों को होती है जो डायबिटीज, हाइपरटेंशन, लाइफ स्टाइल में बदलाव, मोटापा, धूम्रपान आदि का पहले से शिकार होते हैं. बीमारी : कंप्लीट हार्ट ब्लॉकलक्षण : अचानक चक्कर आता है, छाती पर भारीपन का एहसास होता है, आंखों के सामने अंधेरा छाना तथा उल्टी का मन करना.उपाय : रेगुलर एक्सरसाइज करें, मोटापा पर कंट्रोल रखें, बाहर के खाना से परहेज करें, धूम्रपान न करें.
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संभव है कंप्लीट हार्ट ब्लॉक का इलाज
डॉ अरविंद चरन मंगल, जनरल फीजिशियन जब हार्ट के अट्रिया से इलेक्ट्रक सिग्नल आसानी से पास नहीं होते तो उस बीमारी को कंपलीट हॉर्ट ब्लॉक कहा जाता है. साधारण शब्दों में कहा जाये तो हार्ट के ऊपरी चेंबर में इलेक्ट्रक सिग्नल न पहुंचने के कारण ही यह बीमारी होती है. ऐसे में मरीज के हार्ट […]
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Prabhat Khabar Digital Desk
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