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जमशेदपुरः कंपोजिट कंट्रोल रूम (सीसीआर) डीएसपी के रूप में महिला पुलिस अधिकारी जसिंता केरकेट्टा ने पिछले दिनों योगदान दिया है. सीसीआर डीएसपी जसिंता केरकेट्टा के अनुसार छेड़खानी या अन्य महिला अपराध से संबंधित पीडि़त महिलायें, छात्रायें उनसे फोन (100 व मोबाइल) पर संपर्क कर सकती हैं या कार्यालय में मिल सकती हैं. महिलाओं की सुरक्षा […]

जमशेदपुरः कंपोजिट कंट्रोल रूम (सीसीआर) डीएसपी के रूप में महिला पुलिस अधिकारी जसिंता केरकेट्टा ने पिछले दिनों योगदान दिया है.

सीसीआर डीएसपी जसिंता केरकेट्टा के अनुसार छेड़खानी या अन्य महिला अपराध से संबंधित पीडि़त महिलायें, छात्रायें उनसे फोन (100 व मोबाइल) पर संपर्क कर सकती हैं या कार्यालय में मिल सकती हैं. महिलाओं की सुरक्षा को लेकर ह्यप्रभात खबरह्ण से उनकी खास बातचीत हुई. पेश है उसके अंश :
प्रश्न : डीएसपी के रूप में आपका पहला कदम क्या होगा?
उत्तरत्रडीएसपी का पदभार ग्रहण किये अभी दो सप्ताह ही हुए हैं. सबसे पहले यहां की समस्याओं के बारे में जानकारी ले रही हूं. हालात काफी बदल गये हैं.
प्रश्नत्रमौजूदा समय में शहर की स्थिति कैसी है?
उत्तरत्रशहर में क्राउडनेस (भीड़) बढ़ा है. लोग पहले से अधिक व्यस्त और निजी हो गये हैं. शायद इसी वजह से हिंसात्मक घटनाएं बढ़ी हैं.
प्रश्नत्रमहिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था के लिए आप क्या करेंगी.
उत्तरत्रमहिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रख कर महिला थाना व महिला कोषांग खोला गया है, जो काफी कारगर साबित हो रहा है. इसके अलावा महिलाओं की समस्या या शिकायत पर वे मुझसे सीसीआर में आकर मिल सकती हैं और अपनी बातें रख सकती हैं.
प्रश्नत्रकिसी विपरीत परिस्थिति में क्या महिलाएं आपसे सीधे संपर्क कर सकती है ?
उत्तरत्रबिलकुल. सरकारी फोन नंबर अभी मिला नहीं है, महिलाएं चाहें तो सीधे तौर पर 100 डायल कर मुझसे बात कर सकती हैं या फिर साकची स्थित सीसीआर कार्यालय में आकर मिल भी सकती हैं. इसके अलावा शहर के स्कूल, कॉलेज, चौक, चौराहे व अन्य जगहों पर मैं विजिट करुंगी, इस दौरान भी महिलाएं आकर मुझसे मिल सकती हैं.
प्रश्नत्रपुलिस ऑफिसर होने के साथ-साथ आप मां और पत्नी भी हैं. जीवन के दोनों पक्ष को कैसे संभालती हैं?
उत्तरत्रजब ड्यूटी पर रहती हूं तो ड्यूटी ही प्र्राथमिकता होती है. वहीं घर जाने के बाद सिर्फ एक पत्नी और मां बन जाती हूं. अभी बच्चे बड़े हो गये हैं इसलिए ज्यादा परेशानी नहीं होती है. जब वे छोटे-छोटे थे तो ड्यूटी के बाद उनकी ड्यूटी करनी पड़ती थी.
प्रश्न त्रमहिलाओं को क्या संदेश देना चाहती हैं.
उत्तरत्रमहिलाओं की सुविधा के लिए महिला थाना और महिला कोषांग दोनों ही मौजूद है.महिलाएं अपनी शिकायतों को लेकर आ रही हैं और उसे सुलझाया भी जा रहा है. जहां तक संदेश देने की बात है मैं उन महिलाओं को जो पारिवारिक विवाद लेकर थाना आती हैं उनसे थोड़ा सा और धैर्य रख कर परिवार को संजोये रखने की गुजारिश करूंगी.

Prabhat Khabar Digital Desk
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