एनएच: सरकारी भूमि न मिलने से फोर लेन का काम बाधित

जमशेदपुर: राज्य सरकार की ओर से एनएच-33 के लिए जमीन हस्तांतरित न किये जाने से पथ के फोर लेनिंग का काम बाधित हो रहा है. रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवे मिनिस्ट्री की ओर से इस संबंध में राज्य सरकार को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है. एनएच-33 के रांची-महुलिया (जमशेदपुर) सेक्शन में राजधानी के […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | April 5, 2015 7:20 AM
जमशेदपुर: राज्य सरकार की ओर से एनएच-33 के लिए जमीन हस्तांतरित न किये जाने से पथ के फोर लेनिंग का काम बाधित हो रहा है. रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवे मिनिस्ट्री की ओर से इस संबंध में राज्य सरकार को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है.
एनएच-33 के रांची-महुलिया (जमशेदपुर) सेक्शन में राजधानी के नामकुम क्षेत्र में छह किलोमीटर तक का काम बंद है.

राज्य सरकार ने नामकुम के आरा, बोड़ाम, कोवाली और तुरूप में अब तक जमीन हस्तांतरित नहीं की है. इसके अलावा बुंडू से रड़गांव तक की 12 किलोमीटर तक जमीन का अधिग्रहण नहीं हो पाया है. सरकार की ओर से सड़क निर्माण के कार्य में लगी कंस्ट्रक्शन कंपनी को छूट देने के निर्देश भी दिये गये हैं.

वहीं, महुलिया से बहरागोड़ा-खड़गपुर सेक्शन का भूमि अधिग्रहण का मामला भी जमीन न मिलने से अटका पड़ा है. राज्य सरकार भूमि अधिग्रहण के संबंध में प्रमाणिकरण प्रमाण पत्र (गवर्नमेंट वेरीफिकेशन एंड ऑथेंटिकेशन) 3 (ए) और 3 (डी) के तहत नहीं दे रही है.
सरकार की ओर से एनएचएआइ को 39.441 हेक्टेयर जमीन हस्तांतरित की जानी है. 3(जी) नियम के तहत 77.662 हेक्टेयर भूमि का इस्टीमेट सरकार को सौंपा गया है. यह भी सरकार के स्तर पर लंबित है.
समय पर जारी नहीं हो रहा वन भूमि से संबंधित एनओसी
एनएच-33 के अंतर्गत आनेवाले वन भूमि को लेकर सरकार कई अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) समय पर निर्गत नहीं कर रही है. जंगल-झाड़ी के बाबत अनापत्ति प्रमाण पत्र भी न दिये जाने से निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा है. फॉरेस्ट क्लीयरेंस न दिये जाने से भी कार्य प्रभावित हो रहा है. पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त ने 23 अप्रैल 2014 को ही 2.64 हेक्टेयर वन भूमि को डी-नोटिफाई करने का आग्रह किया था. वहीं, अब तक केंद्र की ओर से वाइल्ड लाइफ क्लीयरेंस नहीं दिया गया है. इसी तरह रड़गांव-महुलिया सेक्शन में स्टेज-1 और स्टेज-2 क्लीयरेंस भी न मिलने से सड़क निर्माण के लिए जमीन नहीं मिल रही है. इसकी वजह से 9.769 हेक्टेयर भूमि राष्ट्रीय उच्च पथ प्राधिकार को नहीं मिल पाया है.