एक बिजली मिस्त्री के भरोसे एमजीएम अस्पताल
फ्लैग- तीन जिलों सहित आसपास के क्षेत्र से पहुंचते हैं मरीज – 550 बेड के अस्पताल में प्रतिदिन 500 से 600 मरीज आते हंै – आर्थो, सर्जरी, बर्न, मेडिकल, ओपीडी सहित अन्य कई है विभाग- बिजली चली जाने पर अंधेरे में रहते हैं मरीज संवाददाता, जमशेदपुर कोल्हान के सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल एमजीएम (550 बेड) […]
फ्लैग- तीन जिलों सहित आसपास के क्षेत्र से पहुंचते हैं मरीज – 550 बेड के अस्पताल में प्रतिदिन 500 से 600 मरीज आते हंै – आर्थो, सर्जरी, बर्न, मेडिकल, ओपीडी सहित अन्य कई है विभाग- बिजली चली जाने पर अंधेरे में रहते हैं मरीज संवाददाता, जमशेदपुर कोल्हान के सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल एमजीएम (550 बेड) सिर्फ एक बिजली मिस्त्री के सहारे चल रहा है. झारखंड के तीन जिलों सहित आस-पास के राज्य से लोग यहां इलाज कराने पहुंचते हैं. अस्पताल में मात्र एक बिजली मिस्त्री रहने के कारण लोड शेडिंग होने पर परेशानी बढ़ जाती है. अस्पताल के सभी वार्ड में जेनरेटर चालू करना व बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने में काफी समय लग जाता है. कभी-कभी कोई एक जेनरेटर चालू करने में दिक्कत होने पर अन्य विभागों पर इसका असर पड़ता है. ऐसी ही स्थिति शुक्रवार को हुई. शुक्रवार को अस्पताल के मरीजों को रात्रि भोजन दिया जा रहा था. इस दौरान बिजली चली गयी. इस दौरान जिन्हें भोजन मिल गया था, उन्हें अंधेरे में ही भोजन करना पड़ा. ऐसे में अगर उनके भोजन में कीट-फतंग गिर जाये, तो इसकी जानकारी भी नहीं मिलेगी. शुक्रवार को बिजली चले जाने के बाद इमरजेंसी वार्ड का जेनरेटर चालू करने में 15 मिनट लग गया. इस कारण करीब आधे घंटे मरीजों को अंधेरे में गुजारना पड़ा. पहले आउटसोर्स था बिजली संबंधी कार्य अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि पहले अस्पताल में बिजली का काम ठेका पर था. 21 अगस्त 2014 से ठेका खत्म हो गया. उसके बाद टेंडर नहीं हुआ.
