गर्भवती व बुजुर्गों के लिए जहर हैं पटाखे

गर्भवती व बुजुर्गाें के लिए जहर हैं पटाखे – दीपावली खुशियाें का त्याैहार, दूसराें का रखें ख्याल- पटाखे फाेड़ने में बरतें सावधानीउपमुख्य संवाददाता, जमशेदपुर दीपावली खुशी, सुख-शांति का पर्व है. पटाखों के कान-फोड़ू शोर और प्रदूषण से त्योहार की खुमारी को बरबाद न करें. पटाखे बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं के लिए विनाशकारी हथियार से कम […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | November 10, 2015 7:38 PM

गर्भवती व बुजुर्गाें के लिए जहर हैं पटाखे – दीपावली खुशियाें का त्याैहार, दूसराें का रखें ख्याल- पटाखे फाेड़ने में बरतें सावधानीउपमुख्य संवाददाता, जमशेदपुर दीपावली खुशी, सुख-शांति का पर्व है. पटाखों के कान-फोड़ू शोर और प्रदूषण से त्योहार की खुमारी को बरबाद न करें. पटाखे बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं के लिए विनाशकारी हथियार से कम नहीं हैं. पटाखों से सल्फर डाइआक्साइड और नाइट्रोजन डाइआक्साइड जैसे हानिकारक गैस पर्यावरण में घुल जाते हैं, जो शरीर के लिए नुकसानदेह हैं.पटाखों की धुंध से सांस फूलने, घबराहट, खांसी, हृदय और फेफड़े संबंधी दिक्कत, आंखों में संक्रमण, दमा का अटैक, गले में संक्रमण आदि का खतरा होता है. वहीं आतिशबाजी के कारण दिल का दौरा, रक्तचाप, नाक की एलर्जी, ब्रोंकाइटिस और निमोनिया जैसी स्वास्थ्य समस्याओं के खतरे बढ़ जाते हैं. दमा और दिल के मरीज को खास सावधानियां बरतनी चाहिए. पटाखों से कान का परदा फटने तक की नौबत आ जाती है. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार में पटाखों के कारण दीपावली के बाद वायु प्रदूषण छह से दस गुना और आवाज का स्तर 15 डेसिबल तक बढ़ जाता है. तेज आवाज वाले पटाखों का सबसे ज्यादा असर बच्चों, गर्भवती महिलाओं, दिल और सांस के मरीजों पर पड़ता है. इतना ध्वनि प्रदूषण बहरा बनाने के लिए पर्याप्तएनएमएल के वैज्ञानकि डॉ एनजी गाेस्वामी के अनुसार एक लाख कार के धुआं से जितना नुकसान पर्यावरण को होता है, उतना नुकसान 20 मिनट की आतिशबाजी से हो जाता है. आम दिनों में शोर का मानक स्तर दिन में 55 व रात में 45 डेसिबल के लगभग होता है. दीपावल‍ी आते-आते ये 70 से 90 डेसिबल तक पहुंच जाता है. इतना शोर हमें बहरा बनाने के लिए पर्याप्त है. बरतें सावधानीदीपावली में हर साल कई लोग पटाखों से जल जाते हैं, वहीं कई अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं. अनार, रॉकेट, रस्सी बम जैसे धमाकेदार पटाखों के शौकीन के साथ इन हादसों की ज्यादा संभावना होती है. ऐसे में क्षणिक सुख पहुंचाने वाली हानिकारक चीजाें से बचें. संभव हाे ताे पटाखें फाेड़ने से बचें.