जीने की कला सिखाता है श्रीमद्भागवत : कमलामाता

जीने की कला सिखाता है श्रीमद्भागवत : कमलामाता (फोटो आयी होगी)फ्लैग:::: श्रीकृष्ण मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का दूसरा दिनलाइफ रिपोर्टर @ जमशेदपुर टेल्को स्थित श्री कृष्ण मंदिर में चल रहे श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन प्रवचनकर्ता कमला मां ने भागवत के प्रथम स्कंध पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि भागवत एक अलौकिक ग्रंथ […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | December 14, 2015 9:52 PM

जीने की कला सिखाता है श्रीमद्भागवत : कमलामाता (फोटो आयी होगी)फ्लैग:::: श्रीकृष्ण मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का दूसरा दिनलाइफ रिपोर्टर @ जमशेदपुर टेल्को स्थित श्री कृष्ण मंदिर में चल रहे श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन प्रवचनकर्ता कमला मां ने भागवत के प्रथम स्कंध पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि भागवत एक अलौकिक ग्रंथ है, जिसमें जन कल्याण की उत्तम साधना की गयी है. नारदजी के पूर्वजन्म की कथा बताते हुए उन्होंने कहा कि नारद जी का जन्म एक निम्न परिवार में हुआ था, परन्तु उन्होंने माता तथा गुरुजनों की सेवा कर परम पद प्राप्त किया. नारदजी ने व्यास का असंतोष दूर किया तथा उन्हें चार श्लोकी भागवत सुनाया, जिसे ब्यास जी ने 18600 श्लोकों में सविस्तार एवं जन सामान्य की बुद्धि के लिए ग्राह्य रूप में प्रस्तुत किया. उन्होंने कहा कि सत्य, दया, तप और पवित्रता धर्म के ये चार स्तंभ कहे गये हैं. दया जिसे धर्म का मूल माना गया है, परन्तु आज लोगों के मन में दया का अभाव है. तप ने लोगों का साथ छोड़ दिया है, अर्थात् लोग मेहनत से घबराने लगे हैं. परीक्षित ने कलि का निग्रह किया और उसे रहने का स्थान दिया. परीक्षित, यानी अनेक परीक्षाओं से गुजरने वाला. परीक्षित जन्म से ही श्रीमन्नारायण के भक्त रहे, क्योंकि स्वयं नारायण ने ही गर्भ में उनकी रक्षा की थी. उन्होंने बताया कि परीक्षित ने शमीक ऋषि का अपराध किया, जिसके कारण उनके पुत्र ने परीक्षित को सात दिनों के बाद तक्षक नाग के दंश से मृत्यु का शाप दिया. सारे जीव शापित हैं इन्हीं सात दिनों में मृत्यु को प्राप्त होने के लिए. परीक्षित ने अपना सर्वस्व त्याग कर गंगा किनारे अनासक्त होकर श्रीमद्भागवत की कथा सुनी और शुकदेवजी ने उन्हें कथा सुना कर उनका जीवन सुधारा.