भक्त के अनन्य विश्वास से बंधे होते हैं भगवान(फोटो दुबेजी की होगी)भक्त-भगवान संबंध पर बोले आचार्य राजेंद्र अग्रसेन भवन में श्याम सखी परिवार का आयोजनजमशेदपुर : सतयुग में भगवान को अपने भक्त के कारण पत्थर से बाहर निकल कर प्रकट होना पड़ा. भक्त प्रह्लाद की अनन्य भक्ति ने उन्हें इसके लिए मजबूर किया तो त्रेता युग में उन्हें अपने भक्त को पत्थर से बाहर निकालना पड़ा. उक्त आशय के विचार वृंदावन से पधारे भागवत मर्मज्ञ आचार्य राजेंद्र जी महाराज ने शनिवार को भक्त एवं भगवान के संबंधों पर चर्चा के दौरान कहीं. वे श्याम सखी परिवार की ओर से साकची अग्रसेन भवन में आज से आरंभ उक्त धार्मिक अनुष्ठान में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे. आचार्य जी ने कहा कि गौतम ऋषि की शाप ग्रस्त पत्नी अहिल्या को भगवान ने अपने स्पर्श से पुनः नारि रूप प्रदान किया. पर कलियुग में भक्त ने प्रेत में विट्ठल के रूप में भगवान के दर्शन कर लिये. यह सब संभव हुआ भक्त एवं भगवान के बीच अनन्य विश्वास पूर्ण संबंधों के कारण. भक्त की भगवान के प्रति अनन्य भक्ति की डोर में बंध कर ही भगवान को बार-बार अवतरित होना पड़ता है. उन्होंने अपनी इन स्थापनाओं की अनेक पौराणिक प्रसंगों के माध्यम से पुष्टि भी की. यह आयोजन आगामी 4 जनवरी तक चलेगा. आज की कथा में श्याम सखी परिवार के पदाधिकारियों के अलावा बड़ी संख्या में अन्य श्रद्धालु भी शामिल हुए.
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भक्त के अनन्य वश्विास से बंधे होते हैं भगवान
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Prabhat Khabar Digital Desk
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