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स्थानीय नीति में संशोधन नहीं, तो फैलेगा आक्रोश : अर्जुन मुंडा

8 May, 2016 6:51 am
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स्थानीय नीति में संशोधन नहीं, तो फैलेगा आक्रोश : अर्जुन मुंडा

पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता अर्जुन मुंडा ने कहा जमशेदपुर : राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा नेता अर्जुन मुंडा ने कहा कि झारखंड में स्थानीय नीति बनाने में संवैधानिक तथ्यों की अनदेखी की गयी है. स्थानीय नीति तय करने में सरकार को यह ध्यान रखना चाहिए था कि संविधान पर प्रहार न हो. लेकिन […]

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पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता अर्जुन मुंडा ने कहा

जमशेदपुर : राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा नेता अर्जुन मुंडा ने कहा कि झारखंड में स्थानीय नीति बनाने में संवैधानिक तथ्यों की अनदेखी की गयी है. स्थानीय नीति तय करने में सरकार को यह ध्यान रखना चाहिए था कि संविधान पर प्रहार न हो. लेकिन जाने-अनजाने में सरकार ने संवैधानिक तथ्यों की अनदेखी की है.
स्थानीय नीति में संशोधन के लिए सरकार को लिखा है. सरकार अगर इसमें संशोधन नहीं करती है, तो राज्य के एक बड़े तबके में आक्रोश फैलेगा और बाद में भयानक स्थिति पैदा होगी. इसे संभालना मुश्किल होगा. अर्जुन मुंडा ने शनिवार को जमशेदपुर में सोनारी में एक निजी कार्यक्रम में भाग लेने आये थे.
सब जगह हुआ है संविधान का पालन : उन्होंने कहा : कई राज्यों में स्थानीय नीति तय है. सब जगह पर संविधान का पालन हुआ है. मुख्य तौर पर डेमोग्राफी, जियोग्राफी, इकोलॉजी और पर्यावरण पर भी ध्यान देना चाहिए. पांचवीं अनुसूची की बातों पर भी ध्यान देना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि संस्कृति और परंपरा पर प्रहार नहीं हो, इसका पूरा ख्याल रखा जाना चाहिए.
फेडरल सिस्टम का पालन होना चाहिए था : अर्जुन मुंडा ने कहा : स्थानीय नीति को लेकर देश में लागू फेडरल सिस्टम को प्रभावी बनाना चाहिए. जो जिस क्षेत्र में रहनेवाले हैं, उन्हें नौकरी में प्राथमिकता जरूर मिलनी चाहिए. इस कारण स्थानीय नीति को लेकर संशोधन जरूरी है. तीसरी और चौथी श्रेणी की नौकरी में स्थानीय लोगों को मौका मिलना चाहिए.
क्या रातों-रात काम हो गया
यह पूछे जाने पर कि रघुवर सरकार कहती है कि पिछले 14 साल में राज्य में विकास कार्य नहीं हुए, इस पर अर्जुन मुंडा ने पूछा कि क्या सब कुछ एक रातमें हो गया? उन्होंने कहा : अगर कुछ नहीं हुआ तो यह और अच्छा है कि वर्तमान सरकार के लिए बहुत कुछ करने को बचा है.
क्या-क्या बोले
सरकार ने स्थानीय नीति बनाने में संवैधानिक तथ्यों की अनदेखी की
स्थानीय नीति में संशोधन के लिए सरकार को लिखा है पत्र
पांचवीं अनुसूची की बातों पर भी ध्यान देना चाहिए
मुझसे सुझाव नहीं लिया गया था
अर्जुन मुंडा ने कहा : स्थानीय नीति को लेकर मुझसे कोई सुझाव नहीं लिया गया था. मैं बैठकों में जाता ही नहीं. इस कारण ड्राफ्ट के बारे में भी जानकारी नहीं थी. विपक्ष को फोरम में ही बातें उठानी चाहिए. बेवजह मुद्दा नहीं बनाये जाये, ताकि राज्य में सब कुछ सामान्य रहे.
सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन से भ्रम
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा : सीएनटी व एसपीटी एक्ट में संशोधन को लेकर कुछ मुद्दों पर भ्रम होने की संभावना है. पहले कोई भी व्यक्ति ट्राइबल लैंड लेने पर एसएआर कोर्ट में जाकर मामले को सुलझाता था. लेकिन अब यह संभावना समाप्त हो गयी है. कई लोग ऐसे हैं, जो 25 से 30 साल से रह रहे हैं, लेकिन ऐसी जमीन को खाली करना नहीं चाह रहे हैं. ऐसे में कैसे इस पर फैसला लिया जायेगा, यह भी तय होना चाहिए. नहीं तो जो भी व्यक्ति है, वह केस लड़ते-लड़ते मर जायेगा, लेकिन फैसला नहीं आयेगा.
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