आदिवासी स्वशासन व्यवस्था पर हमला

नगर निगम. ग्राम प्रधानों ने पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र बता डीसी के समक्ष जताया िवरोध, कहा... पारंपरिक ग्राम प्रधानों ने आदिवासी व मूलवासियों का विभिन्न तरह से कर व लगान लगाकर शोषण किये जाने की आशंका जताते हुए नगर निगम गठन का विरोध जताया है. जमशेदपुर : पारंपरिक ग्राम प्रधानों ने पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में नगर […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | February 9, 2017 6:37 AM

नगर निगम. ग्राम प्रधानों ने पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र बता डीसी के समक्ष जताया िवरोध, कहा

पारंपरिक ग्राम प्रधानों ने आदिवासी व मूलवासियों का विभिन्न तरह से कर व लगान लगाकर शोषण किये जाने की आशंका जताते हुए नगर निगम गठन का विरोध जताया है.
जमशेदपुर : पारंपरिक ग्राम प्रधानों ने पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में नगर निगम का विरोध किया है. बुधवार को शहर से सटे 9 राजस्व गांवों के पारंपरिक ग्राम प्रधान उपायुक्त से मिले और उन्हें मांग पत्र सौंपा. माझी परगाना महाल भी नगर निगम के विरोध में भी रांची जाकर राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से मिलकर आपत्ति दर्ज करा चुका है.
पारंपरिक ग्राम प्रधानों का तर्क है कि पूर्वी सिंहभूम जिला संविधान की पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आता है. जमशेदपुर को नगर निगम बनाने से शहर के आसपास के 32 राजस्व ग्रामों को इसमें शामिल किया जायेगा. इससे हजारों सालों से चली आ रही रूढ़ी प्रथा, आदिवासी परंपरागत स्वशासन व्यवस्था समाप्त हो जायेगी. आदिवासी-मूलवासियों का विभिन्न तरह के कर व लगान लगाकर शोषण किया जायेगा. इससे वे पलायन व भागने को मजबूर हो सकते हैं.
पांचवीं अनुसूिचत क्षेत्र में वैधानिक प्रावधान के तहत नगर निगम, नगरपालिका व नगर परिषद का गठन नहीं हो सकता है. आदिवासी स्वशासन व्यवस्था व समाज को बचाने के लिए इसके गठन पर रोक लगाया जाये, अन्यथा आदिवासी समुदाय अपनी अस्तित्व को बचाने के लिए जनांदोलन करने को बाध्य होंगे. प्रतिनिधिमंडल में तालसा के ग्राम प्रधान दुर्गाचरण मुर्मू, किनूडीह के भागमत सोरेन, जगन्नाथपुर के लखन सोरेन, बेड़ाढ़ीपा के मिर्जा हांसदा, आहारघुटू के गुमदी मुर्मू, भुडरूडीह के शंकरराम बेसरा, सारजामदा के जयशंकर टुडू, पोंडेहासा के भोक्ता हांसदा के अलावे रमेश मुर्मू, सालखन मार्डी, भुगलू सोरेन, उदय हेंब्रम, रविशंकर मार्डी, विक्रम मुर्मू आिद मौजूद थे.