मेक इन इंडिया ट्रेड फेयर में लगायेंगे स्टॉल, स्वावलंबी बनेंगे शहर के किन्नर, करेंगे रोजगार

जमशेदपुर: ट्रेन में भीख मांग कर हमारी लाइफ नहीं बन सकती, इसलिए हमने मेहनत कर रोजगार का रास्ता चुना है, ताकि खुद का भविष्य संवारने के साथ-साथ दूसरे किन्नरों का भी भविष्य संवार सकें, उन्हें रोजगार दे सकें. यह कहना है थर्ड जेंडर के आदित्यपुर निवासी अमरजीत का. अमरजीत बताते हैं कि उन्होंने अपने 3 […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | March 15, 2017 9:14 AM
जमशेदपुर: ट्रेन में भीख मांग कर हमारी लाइफ नहीं बन सकती, इसलिए हमने मेहनत कर रोजगार का रास्ता चुना है, ताकि खुद का भविष्य संवारने के साथ-साथ दूसरे किन्नरों का भी भविष्य संवार सकें, उन्हें रोजगार दे सकें. यह कहना है थर्ड जेंडर के आदित्यपुर निवासी अमरजीत का. अमरजीत बताते हैं कि उन्होंने अपने 3 अन्य साथियों के साथ स्वावलंबन की दिशा में कदम रखा है. उनके साथियों में आनंद सिंह, भानुप्रिया व रजिया शामिल हैं. अमरजीत ने बताया कि फिलहाल वे झारखंड महिला उद्यमी संघ की सचिव कृष्णा दत्ता के साथ मिलकर मसालों के रोजगार में कदम रख रहे हैं.

रोजगार की की ओर कदम बढ़ाने की परेरणा उन्हें इन्हीं से मिली. यह पहला मौका होगा जब गोपाल मैदान में ‘मेक इन इंडिया ट्रेड फेयर’ नाम से 18 से 26 मार्च तक में लगनेवाले मेले में हम अपना भी स्टॉल लगाएंगे. जिसमें हम हल्दी, जीरा, धनिया, मिर्च, गर्म मसाला, चाट मसाला पाउडर की बिक्री करेंगे. फिलहाल हम इसे सोनारी में ही दुकान से पिसाकर तैयार कर रहे हैं. शहर में कर रहे हैं सोशल वर्क : हमने उत्थान नाम की सामाजिक संस्था बनायी है, जिसके बैनर तले हम समय-समय पर सामाजिक काम करते हैं. हमने शहर के विभिन्न हिस्सों जैसे मानगो, आदित्यपुर, कदमा, बिष्टुपुर में बॉक्स लगाये हैं. इन बॉक्स में कोई भी व्यक्ति, जिसके पास दवाइयां हैं और वे एक्सपायर्ड नहीं हैं, उसमें डाल सकता है, यह जरूरतमंद के काम आ सकेगा. हमारी साथी बॉबी कपड़ों की अच्छी डिजाइनिंग करती है. हमलोग आगे लोन लेकर खुद का काम करने की सोच रहे हैं, जिसमें हम बुटिक चलाएंगे व दूसरों को भी जोड़ंेगे.

समाज थर्ड जेंडरों को नहीं करता स्वीकार
अमरजीत बताती हैं कि कई लोग राह चलते हमें छेड़ते हैं. यह अच्छा नहीं लगता, लेकिन आम लोगों की तरह हम भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराने जाते हैं. लेकिन वहां भी हमें सामान्य आदमी को मिलने वाला हक हमें नहीं मिलता. आज भी समाज थर्ड जेंडरों को स्वीकार नहीं करता. हम यदि किसी कंपनी में भी काम करें तो वहां भी हमसे छेड़छाड़ होती है, जो बरदाश्त के बाहर है. हमने समाज से सम्मान पाने के लिए ही रोजगार के क्षेत्र में कदम रखा है.