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लोको की बच्ची को दिल्ली ले जाकर बेचा

29 Apr, 2017 5:17 am
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लोको की बच्ची को दिल्ली ले जाकर बेचा

एक वर्ष से कैद बच्ची पहुंची दिल्ली पुलिस के पास, दो वर्ष तक रही एनजीओ के पास जानेगोड़ा की ममता ने गुमला में अपनी बहन सुमंती के जरिये दिल्ली में दिलीप को बेची थी बच्ची जमशेदपुर : परसुडीह के लोको महतो पाडा शनि मंदिर के पास रहने वाली नाबालिग को दिल्ली ले जाकर बेच दिया […]

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एक वर्ष से कैद बच्ची पहुंची दिल्ली पुलिस के पास, दो वर्ष तक रही एनजीओ के पास

जानेगोड़ा की ममता ने गुमला में अपनी बहन सुमंती के जरिये दिल्ली में दिलीप को बेची थी बच्ची
जमशेदपुर : परसुडीह के लोको महतो पाडा शनि मंदिर के पास रहने वाली नाबालिग को दिल्ली ले जाकर बेच दिया गया. बच्ची किसी तरह से दिल्ली पुलिस तक पहुंची. पुलिस ने उसे 25 दिनों तक एनजीओ के पास रखा. सीडब्ल्यूसी के माध्यम से दिल्ली पुलिस ने बच्ची को जमशेदपुर आकर बाल मित्र थाना के अधिकारी डीएसपी कैलाश करमाली के सुपुर्द कर दिया है. डीएसपी ने बच्ची से माता-पिता की जानकारी लेकर उसे लोको पहुंचाया. बच्ची के बयान पर परसुडीह थाना में जानेगोड़ा निवासी ममता नायक, गुमला के कामडरा निवासी ममता की बहन सुमंती नायक, ममता और सुमंती के पति और दिल्ली में रहने वाले दिलीप
नायक के खिलाफ धारा 370 ए और 371 के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. बच्ची के पिता और ममता दोनों एक साथ करते थे काम. पुलिस के मुताबिक बच्ची के पिता श्यामू उरांव और ममता नायक दोनों ठेका मजदूरी में एक ही ठेकेदार के अधीन काम करते थे. दोनों में दोस्ती थी. दो वर्ष पूर्व ममता नायक श्यामू के घर गयी और उसकी तीन बेटी में एक को घर में बच्चे का पालन-पोषण करने की बात कहकर अपने घर ले आयी. ममता ने बच्ची को दूसरे दिन ही गुमला में अपनी बहन के घर शिफ्ट कर दिया. दो दिनों के बाद श्यामू उरांव ने ममता को बच्ची वापस कर देने का दबाव बनाया तो ममता श्यामू को अपनी बहन के घर ले गयी. श्यामू ममता की बातों को दरकिनार करते हुए बच्ची को ले जाने की इच्छा जताते रहे, लेकिन ममता ने बच्ची नहीं दी. श्यामू वापस लौट आये. इधर, ममता और उसकी बहन सुमंती बच्ची को गुमला से दिल्ली ले गये. वहां एक लड़के के हाथों बेच दी.
सड़क पर भटक रही बच्ची को पुलिस तक पहुंचाया
दिल्ली में बच्ची को भटकते हुए एक महिला ने देखा और सारी कहानी सुनने के बाद उसे दिल्ली पुलिस के पास पहुंचा दिया. दिल्ली पुलिस को बच्ची अपना पता नहीं बता पा रही थी. काफी खोजबीन के बाद कुछ पता नहीं चलने पर बच्ची को दिल्ली पुलिस ने मायापुर में निर्मला एनजीओ के पास पहुंचा दिया. वहां बच्ची दो साल तक रही.
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