लाखों खर्च के बाद भी बदहाल घाटशिला, जाम नालियां, सड़कों पर जलजमाव और कचरे के ढेर से लोग परेशान

Updated:
विज्ञापन
लाखों खर्च के बाद भी बदहाल घाटशिला, जाम नालियां, सड़कों पर जलजमाव और कचरे के ढेर से लोग परेशान

East Singhbhum News: घाटशिला में लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद नालियां जाम हैं, कचरे का नियमित उठाव नहीं हो रहा और बारिश में सड़कें जलमग्न हो रही हैं. रूर्बन मिशन के तहत बना कचरा निष्पादन केंद्र भी मशीन के इंतजार में है. पूरी खबर नीचे पढ़ें…

विज्ञापन

ललन सिंह/सिद्धार्थ आनंद
East Singhbhum News: स्वर्णरेखा नदी के किनारे बसे पर्यटन नगरी घाटशिला में स्वच्छता व्यवस्था सवालों के घेरे में है. लाखों रुपये खर्च होने और कई योजनाएं संचालित होने के बावजूद शहर की नालियां जाम हैं, जगह-जगह कचरे का अंबार लगा है और बारिश के दौरान सड़कों पर जलजमाव आम समस्या बन गई है. करीब 50 हजार आबादी वाले घाटशिला शहर के अलावा धरमबहाल, काशिदा, गोपालपुर और पावड़ा पंचायत के 50 से 60 गांवों के लोग भी बदहाल सफाई व्यवस्था से परेशान हैं.

जाम नालियों से सड़कों पर भर रहा बारिश का पानी

शहर के अधिकांश हिस्सों में नालियों की नियमित सफाई नहीं होने से उनमें कचरा जमा है. बारिश होते ही नालियां जाम हो जाती हैं और पानी सड़कों पर बहने लगता है. इससे लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है.

धरमबहाल पंचायत के फूलडूंगरी स्थित पुरानी तहसील कचहरी के पास कचरे का अंबार लगा हुआ है. कॉलेज रोड, गोपालपुर राम मंदिर के समीप और काशिदा मुख्य सड़क किनारे भी गंदगी की यही तस्वीर देखने को मिलती है. गोपालपुर हाथीजोबड़ा पुल से राज स्टेट तक बनी नालियां कचरे से पटी हुई हैं. वहीं यूबीआई मोड़ से अमाईनगर नदी घाट जाने वाली सड़क पर नालियां क्षतिग्रस्त होने और सफाई नहीं होने से अक्सर जलजमाव की स्थिति बनी रहती है. इस मार्ग पर कई स्कूल होने के कारण छात्र-छात्राओं को भी परेशानी झेलनी पड़ती है.

‘क्लीन घाटशिला, ग्रीन घाटशिला’ अभियान केवल दिखावा

वर्ष 2007-08 में तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी सुनील कुमार ने ‘क्लीन घाटशिला, ग्रीन घाटशिला’ अभियान शुरू किया था. उस समय प्रतिदिन ट्रॉलियों और सफाईकर्मियों के माध्यम से शहर से नियमित कचरा उठाया जाता था. वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि कुछ वर्षों तक व्यवस्था बेहतर रही, लेकिन बाद में अभियान धीमा पड़ गया.

इसके बाद वर्ष 2010 से 2012 के बीच तत्कालीन एसडीओ संदीप बक्शी के कार्यकाल में भी विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया, लेकिन वह भी लंबे समय तक प्रभावी नहीं रह सका.

रूर्बन मिशन के बाद भी अधूरा है ठोस कचरा प्रबंधन

रूर्बन मिशन के तहत धरमबहाल और काशिदा पंचायत में पिछले चार वर्षों के दौरान कचरा संग्रह केंद्र, कचरा निष्पादन केंद्र, ट्रॉलियां और करीब दो हजार घरों में डस्टबिन उपलब्ध कराए गए. इसके बावजूद नियमित कचरा निष्पादन व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी है.

काशिदा पंचायत के तामुकपाल में कचरा निष्पादन केंद्र का भवन तैयार है, लेकिन कचरा प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) मशीन अब तक नहीं लगाई गई है. मशीन के अभाव में यह केंद्र चालू नहीं हो पाया है, जिससे ठोस कचरा प्रबंधन की पूरी योजना अधूरी पड़ी है.

स्थायी समाधान की मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष स्वच्छता पर योजनाएं बनती हैं और लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उसका असर दिखाई नहीं देता. लोगों ने नियमित नाली सफाई, समय पर कचरा उठाव और कचरा निष्पादन व्यवस्था को प्रभावी बनाने की मांग की है.

क्या कहते हैं पंचायत प्रतिनिधि

पावड़ा पंचायत की मुखिया पार्वती मुर्मू ने कहा कि घाटशिला शहर को क्लीन और ग्रीन बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ आम लोगों, व्यवसायियों, स्कूलों और सामाजिक संगठनों की भी सक्रिय भागीदारी जरूरी है. पंचायत व जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक पदाधिकारी सभी मिलकर प्रयास करेंगे, तभी स्वच्छ घाटशिला का सपना पूरा होगा.

मुखिया, घाटशिला पंचायत, प्रफुल्ल हांसदा ने कहा – पंचायत को स्वच्छ रखने में जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है. जनप्रतिनिधि और समाजसेवी अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं, लेकिन आम लोगों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक होना होगा.

मुखिया, गोपालपुर पंचायत, सांखी हांसदा ने कहा कि गोपालपुर क्षेत्र में स्वच्छता अभियान तभी सफल होगा, जब हर नागरिक इसकी जिम्मेदारी समझे. सड़क और नालियों की सफाई के लिए सभी को आगे आना होगा.

मुखिया, काशिदा पंचायत, तारामणि मुंडा ने कहा कि काशिदा पंचायत में कचरा संग्रह केंद्र और कचरा निष्पादन केंद्र बनाये गये हैं. काशिदा व विक्रमपुर के करीब एक हजार घरों में डस्टबिन भी वितरित किए गये हैं, लेकिन कचरा निष्पादन की मशीन अब तक नहीं लगने से व्यवस्था पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी है.

धरमबहाल पंचायत के मुखिया बनाव मुर्मू ने कहा कि धरमबहाल पंचायत के ब्लॉक परिसर के पीछे गीले कचरे के निष्पादन की व्यवस्था की गयी है. कचरा संग्रह केंद्र, ट्रॉली और डस्टबिन उपलब्ध कराए गये हैं. अब लोगों की सहभागिता से ही यह व्यवस्था पूरी तरह सफल होगी.

उप प्रमुख, घाटशिला, गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा कि घाटशिला को स्वच्छ और सुंदर बनाने में स्कूल, कॉलेज, बैंक, व्यवसायी और आम नागरिकों की भागीदारी अनिवार्य है. तभी घाटशिला शहर को क्लीन तथा ग्रीन बन सकेगा. पूर्व उप प्रमुख, घाटशिला जगदीश भकत ने कहा कि घाटशिला पर्यटन क्षेत्र है. इसे क्लीन और ग्रीन बनाने के लिए हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी. सभी के सहयोग से ही शहर को स्वच्छ रखा जा सकता है.

विधायक ने दिया समाधान का भरोसा

घाटशिला के विधायक सोमेश चंद्र सोरेन ने कहा कि पंचायतों में स्वच्छता अभियान के तहत कई कार्य किए जा रहे हैं. कचरा निष्पादन केंद्रों में मशीन लगाने के लिए जिला प्रशासन से बात की जाएगी. उन्होंने कहा कि स्वच्छ घाटशिला का सपना तभी साकार होगा, जब प्रशासन के साथ आम लोग भी अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे.

ये भी पढ़ें…

चांडिल में 6 से 12 जुलाई तक रोलिंग ब्लॉक के कारण ये ट्रेनें रद्द, यात्रा से पहले यहां देखें अपडेट 

चाकुलिया में जंगली हाथियों ने तोड़ी लकड़ी मिल की दीवार, राइस मिल में घुसा रामलाल हाथी

विज्ञापन
अमलेश नंदन सिन्हा

लेखक के बारे में

By अमलेश नंदन सिन्हा

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola