लक्ष्य 1800 अॉपरेशन मात्र 40 लक्ष्य से पिछड़ गया जिला

अधिक राशि खर्च कर धनबाद जाकर ऑपरेशन कराते हैं मरीज... नेत्र सर्जन से ओपीडी व पोस्टमार्टम का लिया जाता है काम सूचना देने के बाद भी सर्जरी का सामान नहीं दे रहा विभाग जामताड़ा : भले ही नीति आयोग झारखंड को स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर बताता हो. पर सर जमीन पर सच्चाई कुछ और […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | February 23, 2018 4:36 AM

अधिक राशि खर्च कर धनबाद जाकर ऑपरेशन कराते हैं मरीज

नेत्र सर्जन से ओपीडी व पोस्टमार्टम का लिया जाता है काम
सूचना देने के बाद भी सर्जरी का सामान नहीं दे रहा विभाग
जामताड़ा : भले ही नीति आयोग झारखंड को स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर बताता हो. पर सर जमीन पर सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है. जामताड़ा जिला मोतियाबिंद ऑपरेशन के मामले में काफी पिछड़ा हुआ है. जिला को जो लक्ष्य है, उससे कई गुणा पीछे है. एक मामूली मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए जिला के लोगों को हजारों खर्च कर बाहर जाना मजबूरी हो गया है. जामताड़ा सदर अस्पताल में नेत्र सर्जन का पदस्थापना कर दिया गया है. पर नेत्र सर्जरी के लिए सदर अस्पताल में सर्जरी का सामान तक नहीं है. इससे बड़ी बिडंबना और क्या हो सकती है. नेत्र सर्जन अपने नेत्र विभाग के अलावे पोस्टमार्टम तो जेनरल ड्यूटी कर रहे हैं.
वैसे सदर अस्पताल को एक हजार मातियाबिंद ऑपरेशन का लक्ष्य है. लेकिन सदर अस्पताल में ऑपरेशन करने का सामान ही मौजूद नहीं है. ऐसे में नेत्र सर्जन भी अपनी सर्जरी का काम भूल रहे हैं. वित्तीय वर्ष 2017-18 में जिला को मोतियाबिंद ऑपरेशन में एक हजार आठ सौ लक्ष्य था. लेकिन जनवरी तक मात्र 40 मरीजों का ही मोतियाबिंद का ऑपरेशन हो पाया है. एक एनजीओ ने शिविर लगाकर 40 का ही ऑपरेशन किया था. पिछले वर्ष कई एनजीओ के माध्यम से शिविर लगाकर लक्ष्य तो पूरा किया गया था, लेकिन इस वर्ष एनजीओ
मोतियाबिंद ऑपरेशन का काम करने में रुचि नहीं दिखायी. विभागीय सूत्र के मुताबिक एनजीओ को पहले एक मोतियाबिंद ऑपरेशनमें एक हजार रुपये मिलते थे. लेकिन विभाग ने दर कम कर एक बैग प्रति मोतियाबिंद ऑपरेशन में मात्र छह सौ रुपये ही कर दी. जिसके कारण भी एनजीओ ने मोतियाबिंद ऑपरेशन में रुचि नहीं दिखायी.