प्रतिनिधि, मिहिजामएकीकृत आवास एवं स्लम विकास कार्यक्रम (आइएचएसडीपी) में हुई अनियमितता के कारण स्लम इलाके विकास से दूर रह गये. योजना के प्रावधान के मुताबिक निर्माण कार्य नहीं हुए. यदि अनियमितता नहीं हुई होती तो स्लम विकास की राशि वापस नहीं होती. स्लम इलाके दूसरे इलाके से बेहतर स्थिति में नजर आते. केंद्र की आइएचएसडीपी योजना वित्तीय वर्ष 2009-10 में 27 करोड़ रुपये की राशि के साथ लागू की गयी. 1351 परिवार और स्लम इलाकों को इसका लाभ मिलना था. 21 करोड़ रुपये आवास निर्माण में खर्च किया जाना था. जबकि छह करोड़ रुपये स्लम इलाकों में शौचालय, खेलकूद का मैदान, सराय, पार्क, नाली, सफाई, सड़क, बिजली की रोशनी आदि विकास मूलक व्यवस्थाओं में खर्च किये जाने थे. छह जगहों पर हाइमास्ट लाइट भी लगाये जाने थे. पूर्व के सर्वे में ऐसे स्लम इलाकों को चिह्नित किया गया था. कृष्णानगर, सालबागान, निमायकोठी, राजबाड़ी, हांसीपहाड़ी, और आमबागान काली मंदिर इलाकों को हाइमास्ट लाइट लगाने के लिये चिह्नित किया गया था. एक लाभुक को तीन किस्त में कुल एक लाख 52 हजार रुपये मिलने थे. जांच में यह बात सामने आ चुकी हैं कि चयन समिति ने 255 लाभुकों का चयन किया. लेकिन आवास 816 बांटे गये. उसमें गड़बड़झाला किया गया. 816 आवासों में 12 करोड़ 40 लाख 32 हजार रुपये का गड़बड़झाला हुआ. इसमंे अभी कितने लाभुकों की कई किस्त नहीं मिली है. शेष राशि करीब 14 करोड़ 59 लाख 68 हजार रुपये वापस हो चुकी है. जिनमें स्लम इलाकों के विकास की राशि छह करोड़ रुपये भी शामिल है.
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आईएचएसडीपी की गड़बड़ी जांच जारी
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Prabhat Khabar Digital Desk
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