उन्नत खेती के लिए समय व तकनीक काे विशेष तरजीह दें किसान
प्रभात चर्चा . कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक डॉ संजीव कुमार ने कहा... सवाल: जामताड़ा जिले की मिट्टी किस प्रकार की है, कौन-कौन सी खेती की जा सकती है. अमित पाल कुंडहित जवाब: जामताड़ा जिले की मुख्यत: मिट्टी अम्लीय प्रवृत्ति की है. मिट्टी की पीएच साढ़े चार से सात के बीच है. इस मिट्टी […]
प्रभात चर्चा . कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक डॉ संजीव कुमार ने कहा
सवाल: जामताड़ा जिले की मिट्टी किस प्रकार की है, कौन-कौन सी खेती की जा सकती है.
अमित पाल कुंडहित
जवाब: जामताड़ा जिले की मुख्यत: मिट्टी अम्लीय प्रवृत्ति की है. मिट्टी की पीएच साढ़े चार से सात के बीच है. इस मिट्टी में मुख्यत: धान, मक्का, दलहनी तथा तेलहन की फसलें उपजायी जाने के लिए अनुकूल है.
सवाल: अम्लीय मिट्टी की उपचार की क्या तकनीक है.
किसान लालमोहन कुंडहित
जवाब: अम्लीय मिट्टी की उपचार के लिए पचास किलो ग्राम बूझा हुआ चुना या सौ किलो ग्राम डोलोमाइट का व्यवहार करना चाहिए. इससे मिट्टी की अम्लीयता समाप्त हो जाती है.
सवाल: श्रीविधि तकनीक क्या है.
किसान मोहन नारायणपुर
जवाब: श्रीविधि तकनीक ऐसी तकनीक है, जो कम लागत में अधिक उतपादन करने की तकनीक है. मसलन एक एकड़ जमीन में धान की खेती करने पर महज दो किलो बीज की आवश्यकता होती है. वहीं पांरपरिक तरीके से खेती करने पर एक एकड़ में बीस किलो बीज की जरूरत पड़ती है.
सवाल: जिले में धान के प्रभेद क्या है.
किसान कृष्ण मोहन फतेहपुर
जबाव: जिले में धान के प्रभेद है एमटीयु 7029, सहभागी, ललाट नवीन. निचली जमीन के लिए एमटीयु 7029 है. तथा कम दिनों के धान की फसलें 110 से 120 दिनों के लिए सहभागी, ललाट तथा नवीन है. पानी की स्थति को देखते हुए किसानों को इन किस्मों को अधिक मात्रा में अपनाना चाहिए.
सवाल: दलहनी फसलों की खेती कैसे कर सकते हैं.
किसान सुरेश कुमार करमाटांड़
जवाब : टांड़वाली जमीन में अरहर की खेती की जा सकती है. दलहनी फसलों की खेती के लिए जमीन की जुताई के उपरांत पचास किग्रा प्रति बीघा चुना का प्रयोग करते हुए कम दिनों वाली किस्म उपास 120,मध्यम दिन वाले आशा का उपयोग करने पर अधिक पैदावर होती है. पुष्प आने के समय कीटनाशक का प्रयोग अवश्य करनी चाहिए, जिससे उनकी फली अच्छी होगी तथा अधिक उपज प्राप्त होती है.
सवाल: दलहन व नकदी फसल की खेती एक साथ हो सकती है.
किसान सुमन कुमार नारायणुपर
जबाव: दहलन के साथ नकदी फसल मक्के की खेती एक साथ की जा सकती है. दो कतार अरहर के बीच में एक कतार मक्के की बुआई की जा सकती है. मक्के को भूट्टे के रूप में बेंच कर पैसे कमायी जा सकती है. मक्के का डंटल पशुओं के चारा के लिए भी उपयोगी होता है.
सवाल: मक्के के किस्म के बारे में बतायें.
किसान मिठुन कुमार मूरलीपहाड़ी
जबाव: मक्कें के किस्म है स्वान कम्पोजिट, गंगा सफेद तथा शक्तिमान है. इसकी खेती मई माह के अंतिम सप्ताह या जून माह के प्रथम स्प्ताह के बीच होनी चाहिए. इससे मकके का अधिक उत्पादन होता है.
सवाल: कृषि विज्ञान केंद्र से किसानों को कौन-कौन सी सलाह मिलती है.
असित कुमार नाला
जबाव: किसानों को कृषि-विज्ञान केंद्र से आधुनिक कृषि से जुड़ी तकनीकी सलाह तथा व्यसायिक प्रशिक्षण नि:शुल्क दी जाती है. पशुपालन, बकरी पालन के अलावे युवक युवतियों को डीजल पंपसेट मरम्मति, सिलाई-कताई बुनाई, मशरूम उत्पादन तथा सब्जियों के मूल्यवर्धन पर प्रशिक्षण नि:शुल्क दी जाती है.
सवाल: बीज ग्राम क्या है.
आनंद साव, जामताड़ा
जबाव: किसानों के समूह के द्वारा तैयार की गयी फसलों के बीज को बीज ग्राम कहा जाता है. बीज ग्राम की देख-रेख कृषि विज्ञान केंद्र के द्वारा तकनीकी सहायता प्रदान किया जाता है तथा किसानों का निबंधन कराया जाता है. किसानों के द्वारा उत्पादित बीज को प्रोसेसिंग के माध्यम से दो बारा किसानों तक पहुंचाया जाता है. एक बीज ग्राम के निर्माण के लिए पचास हेक्टयर जमीन की आवश्यकता होती है, जिसमें सभी किसानों का सहभागी होता है.
सवाल: जिले में बागवानी की क्या संभावनाएं है.
उत्पल कुमार मिहिजाम
जबाव: जिले में बागवानी की अपार संभावनाएं हैं. जिले का वातावरण आम की बागवानी के अनुकूल है. आम की बागिचा लगाने के लिए दुधिया मालदाह एवं बांम्बे किस्म के आम लगाया जा सकता है. इसके लिए 30 गुणा 30 फीट की दूरी पर एक मीटर वर्गाकार गड्ढे का निर्माण मई माह में करनी चाहिए तथा जून माह में उस गड्ढे में 20 किलो कम्पोष्ट, करंज की खली तथा चुना आध किलो ग्राम का मिश्रण प्रति गड्ढा भराई करनी चाहिए. इसके अलावे जून या जूलाई में पौधे का रोपण करनी चाहिए. जिले में आम के अलावे अमरूद तथा कटहल फल की बागवानी के लिए भी वातावरण अनुकूल है.
जीवन से जुड़ी चीजों की जानकारी के लिए विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है. प्रभात-खबर हर शनिवार को प्रभात चर्चा का मंच देकर कुछ विशेषज्ञ से बात कर आपकी परेशानी को सुलझाने का काम कर रहा है.इस शनिवार को हमारे मेहमान थे कृषि-विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक डॉ संजीव कुमार. उन्होंने कृषि से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी. प्रस्तुत है आपके द्वारा पूछे गये प्रश्नों के उत्तरों का सिलसिला, जो किसानों के लिए बहुत आवश्यक लाभदायक होगा.
विशेषज्ञ ने किसानों को दिये टिप्स
कम लागत में अधिक धान उत्पादन करने के लिए श्री विधि सबसे बेहतर तकनीक
दलहन के साथ साथ नकदी फसल मक्के की खेती एक साथ की जा सकती है
कीटनाशक का समय पर उपयोग करें
