खलारी : सीसीएल का एनके एरिया उत्पादन सत्र 2018-19 में अपना उत्पादन लक्ष्य हासिल करने के लिए लगातार प्रयासरत है. एरिया के सभी अधिकारी एवं कामगार अपने अपने परियोजनाओं में अपने लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में मेहनत कर रहे हैं. उत्पादन वर्ष 2018-19 में एनके एरिया को कोयला उत्पादन के लिए 67 लाख टन, ओबी उत्पादन के लिए एक करोड़ सोलह लाख घन मीटर तथा कोयला डिस्पैच के लिए 77 लाख टन का लक्ष्य दिया गया है.
दो दिन पहले एन के एरिया प्रबंधन द्वारा एरिया परामर्शदातृ समिति के सदस्य की बैठक के दौरान जो जानकारी दी गयी है, उसके मुताबिक एन के एरिया अपने ओबी उत्पादन के लक्ष्य से आगे निकल गया है. एक करोड़ सोलह लाख घन मीटर की ओबी उत्पादन के लक्ष्य को भेदते हुए 15 मार्च तक एन के एरिया 11686729 घन मीटर ओबी उत्पादन कर चुका था.
इसमें रोहिणी परियोजना के आउटसोर्सिंग में उत्पादन कर रही कंपनी का काफी योगदान है. वही कोयला उत्पादन में एन के एरिया 15 मार्च तक 5643342 टन अर्थात अपने लक्ष्य का 84 प्रतिशत कोयला उत्पादन कर चुका था. एन के एरिया के रोहिणी परियोजना अपने उत्पादन लक्ष्य के आसपास पहुंच चुकी है. रोहिणी परियोजना को कुल तैंतीस लाख कोयला उत्पादन का लक्ष्य मिला है. वह पंद्रह दिन पहले तक लगभग 31 लाख पचास हजार टन कोयला उत्पादन कर चुका है.
15 दिनों में रोहिणी परियोजना को डेढ़ लाख टन कोयला उत्पादन करना है. अगर सब कुछ ठीक रहा तो रोहिणी परियोजना अपने उत्पादन लक्ष्य से आगे भी जा सकती है. इसी तरह पुरनाडीह परियोजना को कुल 26 लाख टन कोयला का उत्पादन लक्ष्य मिला है. इस उत्पादन सत्र के अंतिम माह के पंद्रह दिन तक लगभग 19 लाख टन कोयला उत्पादन हो चुका है.
बाकी पंद्रह दिन में यह परियोजना अपने लक्ष्य तक पहुंच जाये तो यह उसके लिए एक उपलब्धि होगी. इधर केडीएच तथा डकरा परियोजना में कोयला उत्पादन करना इतना सरल नहीं रह गया है इसके बावजूद आठ लाख टन उत्पादन लक्ष्य के विपरीत लगभग साढ़े छह लाख टन कोयला उत्पादन हो चुका है. जहां तक कोयला डिस्पैच का सवाल है तो एन के एरिया को इस वर्ष 77 लाख टन कोयला डिस्पैच करना है. जिसमें अभी तक लगभग 61 लाख टन कोयला डिस्पैच हो चुका है. प्रबंधन के लिए सबसे बड़ी चुनौती एन के एरिया को मुनाफा दिलाने की होगी.
