आंदोलन : मुआवजा नहीं मिलने से ग्रामीण आक्रोशित

खलारी : केडीएच कोयला खदान का करकट्टा विश्रमपुर कॉलोनी की ओर किये जा रहे विस्तारीकरण का काम ग्रामीणों व रैयतों ने रोक दिया है. उनका कहना है कि स्थानीय लोगों से बिना वार्ता किये सीसीएल प्रबंधन ने विस्तारीकरण का काम शुरू कर दिया गया है. जहां से काम शुरू किया गया है, वहां से मात्र […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | July 23, 2015 6:47 AM
खलारी : केडीएच कोयला खदान का करकट्टा विश्रमपुर कॉलोनी की ओर किये जा रहे विस्तारीकरण का काम ग्रामीणों व रैयतों ने रोक दिया है. उनका कहना है कि स्थानीय लोगों से बिना वार्ता किये सीसीएल प्रबंधन ने विस्तारीकरण का काम शुरू कर दिया गया है. जहां से काम शुरू किया गया है, वहां से मात्र पचास मीटर की दूरी पर आबादी है.
भारी मशीनों के चलने के कारण लोगों का रहना मुश्किल हो गया है. इससे पूर्व यहां खदान चलाया गया था, जिसके कारण यहां के सभी आवास जजर्र हो गये हैं. ग्रामीणों ने प्रबंधन से जब तक उनको मुआवजा देकर नहीं हटाया जाता, तब तक विस्तारीकरण का काम रोकने की मांग की है. बंद की सूचना के बाद केडीएच परियोजना पदाधिकारी केडी प्रसाद, एसओपी एके सिंह तथा एसओएम यूसी गुप्ता ने ग्रामीणों से बात की. ग्रामीणों ने अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखी.
परियोजना पदाधिकारी ने कहा कि देश को कोयले की जरूरत है. कोई भी खदान रैयत व ग्रामीणों के सहयोग से ही चलता है. ब्लास्टिंग करने से पहले ग्रामीणों को मुआवजा देकर विस्थापित किया जायेगा. अभी मशीन चला कर रास्ता बनाया जा रहा है. इससे किसी का नुकसान नहीं होने दिया जायेगा. अधिकारियों से आश्वासन मिलने के बाद रैयतों ने आंदोलन वापस ले लिया.
विश्रमपुर पंचायत का अस्तित्व खतरे में
खलारी : केडीएच विस्तारीकरण के कारण विश्रमपुर पंचायत का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है. विस्तारीकरण के बाद इस पंचायत का सबसे बड़ा राजस्व गांव विश्रमपुर उजड़ जायेगा. इससे पहले उक्त पंचायत का जेहलीटांड़ गांव विस्थापित हो चुका है.
विश्रमपुर करकट्टा के उजड़ने के बाद अब इस पंचायत में मात्र दो गांव बच जायेंगे, जिसमें बड़कीटांड़ का कुछ भाग व केकराहीगढ़ा शामिल है. झामुमो प्रखंड अध्यक्ष अनिल पासवान ने सीसीएल प्रबंधन से विश्रमपुर पंचायत को बसाने की मांग की है. ऐसा नहीं किया गया तो झामुमो आंदोलन करेगा.