खलारी व आसपास के क्षेत्र में पानी के लिए त्राहिमाम मचा है. अधिकांश कुएं व चापानल सूख गये हैं. करकट्टा, धमधमिया व चूरी के आसपास के मुहल्लों व गांवों में खरीदने पर भी पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है.
खलारी : चदरा धौड़ा में अधिकांश दिहाड़ी मजदूर रहते हैं. कुछ सीसीएल में काम करनेवाले लोग भी हैं. यहां एक भी चापानल ठीक नहीं है. चदरा धौड़ा में चार-पांच लोगों ने निजी तौर पर अपने घर के अंदर बोरिंग करायी है.
जब पानी के लिए हाहाकार मचने लगा, तो बोरिंग वाले लोगों के घर के बाहर पानी लेनेवालों की भीड़ लगने लगी. उसके बाद बोरिंग मालिकों ने पानी की किल्लत देखते हुए अपनी बोरिंग से पानी देने का फैसला किया. लेकिन इसके लिए 100 रुपये प्रति घंटा के हिसाब से राशि चुकाने की शर्त रखी. जिसे लोगों ने मान लिया. अब बोरिंग मालिक अपने घर के बाहर पाइप निकाल कर मोटर चालू कर देते हैं.
एक घंटा में लोग जरूरत का पानी भर कर स्टोर कर ले रहे हैं. चदरा धौड़ा के लोगों ने बताया कि एक सरकारी डीपबोर उड़िया धौड़ा में है लेकिन वह खराब है. सीसीएल प्रबंधन पहले टैंकर से पानी भेजता था अब वह भी बंद हो गया है. यहां रहनेवाले श्रमिक नेता विजय खटाई ने बताया कि वे स्वयं पानी खरीदने को मजबूर हैं. उन्होंने बताया कि एनके एरिया प्रबंधन (सीसीएल) से बोरिंग कराने की मांग की गयी है. आश्वासन भी मिला है लेकिन अबतक कोई पहल नहीं हो सकी है.