एक वर्ष देर से शुरू हुआ प्रोजेक्ट

गतिरोध के बाद करकट्टा आउटसोर्सिंग पैच के लिए भूमि पूजन खलारी : काफी गतिरोध के बाद करकट्टा आउटसोर्सिंग पैच की माइनिंग के लिए मंगलवार को भूमि पूजन किया गया. करकट्टा आउटसोर्सिंग पैच सीसीएल के एनके एरिया अंतर्गत केडीएच परियोजना का भाग है. इस पैच को आउटसोर्सिंग में दिया गया है. जिसकी माइनिंग निजी कंपनी भीपीआर […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

गतिरोध के बाद करकट्टा आउटसोर्सिंग पैच के लिए भूमि पूजन

खलारी : काफी गतिरोध के बाद करकट्टा आउटसोर्सिंग पैच की माइनिंग के लिए मंगलवार को भूमि पूजन किया गया. करकट्टा आउटसोर्सिंग पैच सीसीएल के एनके एरिया अंतर्गत केडीएच परियोजना का भाग है.

इस पैच को आउटसोर्सिंग में दिया गया है. जिसकी माइनिंग निजी कंपनी भीपीआर माइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड करेगी. गणेश पाहन द्वारा ग्राम देवता की पूजा के बाद उपस्थित सीसीएल के अधिकारी, यूनियन प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि, प्रशासन के लोगों व ग्रामीणों ने बारी-बारी नारियल फोड़ा. भीपीआर ने मशीन चला कर माइनिंग की औपचारिक शुरुआत की.

मौके पर सीसीएल अधिकारियों में जीएम केके मिश्रा के अलावे वीके अग्रवाल, पीओ केडी प्रसाद, एसओपी एके सिंह, यूसी गुप्ता, एके तिवारी, भीपीआर के साइट मैनेजर आरके रेड्डी, प्रखंड प्रमुख सोनी तिग्गा, जिप सदस्य रतिया गंझू, मुखिया सुशीला देवी, पंसस निमिया देवी, जनेशर सिंह, राजीव सिन्हा, विकास सिन्हा, कामता सिंह, विनय खलखो, अनिल पासवान, प्रेम साव, बबलू साव, मितेश सिंह, राजू सिंह, शक्ति सिंह, गौतम सिंह, अरविंद सिंह, सुनील लोहरा, तनवीर आलम, बहुरा मुंडा, विश्वनाथ गंझू, पंकज सिंह, यूनियन प्रतिनिधियों में एसएन सिंह, राघव चौबे, पज्जू महतो, गोल्टेन यादव, नागेंद्र सिंह, सुनील सिंह समेत अन्य उपस्थित थे.

विस्थापन से पूर्व माइनिंग के खिलाफ थे ग्रामीण : करकट्टा के ग्रामीण विस्थापन से पूर्व माइनिंग शुरू करने के खिलाफ थे. माइनिंग शुरू करने के लिए पहले भी दो बार भूमि पूजन के प्रयास हुए लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण संभव नहीं हो सका.

कई दौर की वार्ता चली, तब ग्रामीण माइनिंग शुरू करने देने पर राजी हुए. केडीएच परियोजना के पदाधिकारी केडी प्रसाद ने बताया कि आउटसोर्सिंग में आठ हेक्टेयर जमीन में माइनिंग करना है.भीपीआर को इस पैच से 3.86 मिलियन बीसीएम ओवर बर्डेन व कोयले का उत्पादन करना है. 519 मिलियन के इस प्रोजेक्ट को दो वर्षों में पूरा किया जाना है.

ग्रामीणों के विरोध के कारण प्रोजेक्ट एक साल विलंब से शुरू हुआ है. एनके एरिया के महाप्रबंधक केके मिश्रा ने कहा कि ग्रामीणों ने जिस तरह से सहयोग किया है, प्रबंधन भी उनकी समस्याओं के प्रति हमेशा सजग रहेगा.

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