आदिम जनजाति बहुल खिराखांड़ के सभी घरों में दो माह से लटके हैं ताले

कोई माओवादियों की धमकी, तो कोई बता रहा है ओझा-गुणी का मामला हेरहंज : लातेहार जिले के हेरहंज, पलामू जिले के पांकी व चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड के सीमाने पर स्थित है खिराखांड़ गांव. यह गांव हेरहंज प्रखंड की सलैया पंचायत में है. इस गांव में केवल आदिम जनजाति (परहिया) के लोग रहते हैं. […]

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कोई माओवादियों की धमकी, तो कोई बता रहा है ओझा-गुणी का मामला
हेरहंज : लातेहार जिले के हेरहंज, पलामू जिले के पांकी व चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड के सीमाने पर स्थित है खिराखांड़ गांव. यह गांव हेरहंज प्रखंड की सलैया पंचायत में है. इस गांव में केवल आदिम जनजाति (परहिया) के लोग रहते हैं. यहां परहिया जाति के करीब 10 घर हैं, जिसमें करीब 50-60 लोग रहते थे.
पिछले दो महीने से यह गांव वीरान पड़ा हुआ है. गांव के सभी घरों में ताला लटका है. गांव छोड़ कर सभी लोग क्यों चले गये, इसकी सही जानकारी किसी को नहीं है. गांव छोड़नेवाले भी सही कारण नहीं बता पा रहे हैं. कोई कहता है कि माओवादियों की धमकी के बाद ग्रामीण पलायन कर गये तो कोई इसके पीछे ओझा-गुणी का मामला बता रहा है.
दूसरे गांव में रिश्तेदारों के यहां ठहरे हैं लोग : प्रभात खबर के प्रतिनिधि को जब इस मामले की जानकारी हुई तो गांव जाकर स्थिति का जायजा लिया. यहां सभी घरों में ताला लगा था. यहां के लोग दूसरे गांव में अपने रिश्तेदारों के यहां ठहरे हैं. गांव में जाने के बाद केकरगढ़ निवासी विजय यादव मिले.
उन्होंने बताया कि इस संबंध में खास पता नहीं है, पर ओझा-गुणी का मामला लगता है. पूर्व में गांव में ओझा-गुणी को लेकर विवाद हुआ था. इसके बाद धीरे-धीरे पूरा गांव खाली हो गया. मथुरा परहिया ने बताया कि हमलोग इस गांव में पीढ़ी दर पीढ़ी से रह रहे थे. आज तक यह गांव सरकारी सुविधा से वंचित है.
दो बच्चों समेत तीन की हुई थी मौत : बताते चलें कि अप्रैल-मई में बुखार से बुधन परहिया(70), गौरी कुमारी(3) व खुसबू कुमारी (5) की मौत हो गयी थी. इसके बावजूद भी बीमारी की रोकथाम के लिए कोई विशेष पहल नहीं की गयी थी. यह भी आशंका है कि गांव में फैली बीमारी के कारण लोग पलायन कर गये. थाना प्रभारी सनोज चौधरी ने बताया कि खिराखांड़ गांव के खाली होने की सूचना मिली है, लेकिन कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है.
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